जिले की सातों विधानसभा सीटों पर भाजपा ने क्लीन स्वीप कर अपनी ताकत का अहसास करा दिया। सपा , बसपा और कांग्रेस के प्रत्याशी केसरिया आंधी के सामने टिक भी नहीं पाए। भाजपा स्याना में सबसे अधिक और सदर सीट में सबसे कम अंतर से जीती।
मतगणना के बाद परिणाम आते ही आसमान में अबीर गुलाल उड़ने लगे। डिबाई को छोड़कर बसपा प्रत्याशी छह विधानसभा सीटों पर दूसरे नंबर पर रहे। जिला निर्वाचन अधिकारी ने जीते हुए प्रत्याशियों को सर्टिफिकेट जारी किए। सिकंदराबाद विधानसभा सीट पर भाजपा की विमला सिंह सोलंकी ने बसपा के मौ. इमरान को 28623 मतों से शिकस्त दी।
बुलंदशहर सीट पर भाजपा के वीरेंद्र सिंह सिरोही को एक लाख 11 हजार 538 वोट और बसपा के मौ. अलीम खान को 88454 वोट मिले। सदर पर विरेंद्र सिंह सिरोही ने बसपा उम्मीदवार को 23084 मतों से हराया। स्याना के देवेंद्र सिंह लोधी ने बसपा के दिलनवाज खां को 71630 मताें से शिकस्त दी।
देवेंद्र को एक लाख 25 हजार 854 और बसपा के दिलनवाज खां को महज 54224 वोट मिले। अनूपशहर विधानसभा सीट पर बीजेपी के संजय शर्मा को एक लाख 12 हजार 431 और बसपा के गजेंद्र सिंह को 52117 मत मिले। भाजपा प्रत्याशी ने दो बार के विधायक गजेंद्र सिंह को 60314 मतों से हरा कर इतिहास रच दिया।
खुर्जा सीट पर भाजपा के विजेंद्र सिंह और बसपा के अर्जुन सिंह के बीच लड़ाई रही। भाजपा प्रत्याशी को एक लाख 19 हजार 493 वोट मिले। बसपा के अर्जुन सिंह को महज 55194 वोट मिल सके। अर्जुन सिंह को 64 हजार 299 मतों से हार का मुंह देखना पड़ा। डिबाई से भाजपा की अनीता राजपूत ने सपा के हरीश लोधी को 65 हजार 630 मतों से हराया।
अनीता को एक लाख 11 हजार 807 मत और हरीश लोधी को 46 हजार 177 वोट मिले। मतगणना के बाद रिजल्ट घोषित होते ही जिला निर्वाचन अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने विजयी प्रत्याशियों को सर्टिफिकेट सौंपे।
स्याना में सबसे बड़ी जीत
स्याना विधानसभा सीट पर भाजपा के देवेंद्र लोधी को एतिहासिक जीत मिले। उन्होंने सबसे अधिक 71630 मतों से बसपा के दिलनवाज खां को हराया। सदर सीट पर सबसे कम हार जीत का अंतर रहा।
सदर पर वीेरेंद्र सिंह सिरोही ने बसपा के हाजी अलीम को 23084 मतों से हराया। सिकंदराबाद और सदर विधानसभा सीट पर भाजपा और बसपा उम्मीदवारों में 18 राउंड तक कांटे की टक्कर रही। हालांकि इसके बाद भाजपा के उम्मीदवार बसपा से बढ़त बनाते चले गए।
65 साल बाद जनपद ने रचा इतिहास
आजादी के बाद गठित हुई पहली विधानसभा में क्लीन स्विप परिणाम देने वाले जनपद ने 65 साल बाद रिकॉर्ड तोड़ा है। 1952 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया था तो 65 साल बाद भारतीय जनता पार्टी ने जिले में क्लीन स्वीप किया है।
देश की स्वतंत्रता के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में जनता ने एकतरफा परिणाम दिया था। 1952 में जिले की नौ विधानसभा सीटों पर जनता ने क्लीन स्वीप करते हुए कांग्रेस के पक्ष में जनादेश दिया था। इसके बाद कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि जिले की सभी सीटों पर किसी भी पार्टी ने क्लीन स्वीप किया हो।
इमरजेंसी के बाद चली जनता पार्टी की लहर में 1977 में हुए मध्यावधि चुनाव में भी जनता ने क्लीन स्वीप नहीं किया था। आजादी के बाद दूसरी बार जिले की जनता ने किसी पार्टी के पक्ष में एकतरफा जनादेश दिया है।
65 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी ने जिले की सभी सीटों पर अपना कब्जा जमा लिया। जनपद की दोनों संसदीय सीट पर पहले ही भाजपा का कब्जा है। वहीं आजादी के बाद पहली बार किसी पार्टी के पक्ष में वोटों की झड़ी लगी है। जिले की सभी सीटों पर जीते भाजपा प्रत्याशियों ने रिकॉर्ड मतों से अपने विरोधियों को हराया है।