वरीशा कांड : पुलिस की लापरवाही या कोई साजिश
बुलंदशहर। गाजियाबाद के साहिबाबाद में ट्रॉली बैग में जिस महिला का शव मिला था, उसकी पहचान उसके परिजनों ने वरीशा में रूप में की, सोमवार को नया मोड़ सामने आने पर सबके होश उड़ गए। वरीशा के जिंदा वापस लौटने की कहानी कई पेच नजर आ रहे हैं। साथ ही इस मामले में कहीं न कहीं पुलिस की घोर लापरवाही रही है।
यदि पुलिस मायके पक्ष के अलावा ससुराल पक्ष के लोगों को भी पहचान में शामिल करती तो शायद ऐसा नहीं होता। गुमशुदगी दर्ज कराते समय जो फोटो पति के द्वारा थाने में दिए गए थे। उनसे भी मिलान किया जाता। इस केस की विवेचक सीओ सिटी दीक्षा सिंह ने केवल विवाहिता की मां पर भरोसा किया। न तो फोटो से मिलान किया और न ही ससुराल पक्ष के किसी भी व्यक्ति को साथ लिया। वहीं, वरीशा का मायका अलीगढ़ जनपद के थाना हरदुआगंज के जलील कस्बे में है। यहां की रहने वाली बूंदो ने वरीशा की पहचान की थी। बता दें कि जब वरीशा को ससुराल पक्ष ने पीटा तो उसने फोन करके अपने परिजनों को यह बात बताई। जिसके बाद वरीशा के भाई ने साफ बोल दिया था कि वह मायके में नहीं आएगी। चाहे ससुराल वाले मार दें। यह बात एसएसपी संतोष कुमार सिंह भी स्वीकार रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं ससुराल पक्ष को फंसाने के लिए गलत पहचान की गई हो। वहीं, वरीशा के मंगलवार को सीजेएम के यहां पर बयान हुए हैं। उसने बयानों में क्या कहा। अभी विवेचक सीओ सिटी ने अवलोकन नहीं किया है। बयानों का अवलोकन करने के बाद ही वरीशा को कहां भेजा जाएगा। यह निर्णय लिया जाएगा। यदि उसने बयानों में मायके जाने की बात कही होगी तो मायके जाएगी। ससुराल जाने की बात कही होगी तो ससुराल जाएगी।
यदि जानबूझकर गलत पहचान की गई है तो जांच कराने के बाद पहचान करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इस मामले में अभी जांच चल रही है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
संतोष कुमार सिंह, एसएसपी