बुलंदशहर। बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान से युवाओं की सेहत पर असर दिखने लगा है। इसके चलते युवा भी यूरिक एसिड की चपेट में आने लगे है।
जिला चिकित्सालय की ओपीडी में प्रतिदिन यूरिक एसिड की समस्या लेकर 30 से 40 मरीज आ रहे है। चिकित्सकों का कहना है कि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
जिला चिकित्सालय के परामर्शदाता डॉ. प्रदीप मित्तल ने बताया कि ओपीडी में 200 के करीब मरीज परामर्श लेने आ रहे हैं। इसमें से 30 से 45 आयु वर्ग के लोगों में यूरिक एसिड की समस्या देखने को मिल रही है।
शेष अन्य बीमारियों के मरीज रहते हैं। बताया कि खानपान में बदलाव और बदलती जीवनशैली से समस्या खासकर युवाओं में बढ़ रही है। इसके अलावा वजन ज्यादा होने पर शरीर की कोशिकाएं अधिक यूरिक एसिड बनाती हैं और किडनी इसे उतनी तेजी से बाहर नहीं निकाल पाती।
यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और शरीर से यह तत्व सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाता। इसके चलते मरीजों में जोड़ों में दर्द, सूजन, हाथ-पैरों में जलन और झनझनाहट जैसी परेशानियां होती हैं। पहले यूरिक एसिड की समस्या पहले उम्रदराज लोगों में देखने को मिला करती। अब मरीजों को ब्लड जांच व यूरिन जांच कराने की सलाह दी जा रही है। बीमारी से बचने के लिए खानपान और दिनचर्या में बदलाव जरूर करें। महिला माधुरी व विपिन ने मंगलवार को यूरिक एसिड की समस्या बता परामर्श लिया।
कोट
ओपीडी में यूरिक एसिड के मरीज प्रतिदिन आ रहे है। जोड़ों में तेज दर्द (खासकर पैर के अंगूठे, घुटने, टखने में) सूजन व अकड़न इसके लक्षण है। बीमारी से बचने के लिए अधिक पानी पीएं, नियमित व्यायाम कर, मीठे पेय का प्रयोग कम करें। हरी सब्जियां और फल ज्यादा खाएं। - डॉ. प्रदीप राणा, प्रभारी सीएमएस जिला चिकित्सालय