सूरज की तपिश बढ़ने के साथ बिजली की लुका-छिपी भी बढ़ती जा रही है। शासन के दावे पूरी तरह हवा-हवाई नजर आ रहे हैं। शहर समेत जिलेभर में शेड्यूल के अनुसार बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है। गर्मी तेज होते ही जिले की बिजली डिमांड और सप्लाई के बीच अंतर बढ़ गया है।
स्थानीय अफसर न तो शासन की प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई दे पा रहे हैं और न ही शासन को पावर कट की स्थिति से अवगत करा पा रहे हैं। सूरज की तपिश बढ़ने के साथ ही बिजली सप्लाई घटने लगी है। सत्ता परिवर्तन के बाद प्रदेश के मुखिया ने बेशक रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति और इमरजेंसी रोस्टरिंग नहीं करने के निर्देश दिए हों, लेकिन इनका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है।
इमरजेंसी रोस्टरिंग के नाम पर जमकर कटौती की जा रही है। लोकल स्तर पर ही घंटों तक अतिरिक्त कटौती हो रही है। न तो जिला मुख्यालय पर और न ही तहसील, कस्बों तथा गांवों में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति मिल रही है। बिजली कटौती का कारण इमरजेंसी रोस्टरिंग बताया जा रहा है, जबकि वास्तव में लोकल स्तर पर ही जबरदस्त कटौती की जा रही है।