मौत बांट रहे अपंजीकृत अस्पताल, जिम्मेदार मौन
बुलंदशहर। जिले में अप्रशिक्षित लोगों से इलाज का शिकार होने के बाद प्रतिमाह 10 से अधिक लोग जान गवां बैठते हैं। यह तो सिर्फ उदाहरण है। जगह-जगह बैठे अपंजीकृत, नीम हकीम इलाज के नाम पर प्रतिदिन मरीजों की जान से खेल रहे हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य महकमा मौन है। वहीं, कम दाम में इलाज के चक्कर में गरीब मरीज फंस जाते हैं और अपनी जान गवां बैठते हैं। गत सप्ताह शिकायत पर दो अस्पताल सील किए गए, लेकिन अस्पताल संचालक अब विभागीय अफसरों से साठगांठ कर उन्हें खोलने की तैयारी में जुट गए हैं।
प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए सरकार गंभीर है। जिले में दो जिला अस्पताल, 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 58 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आठ शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसी तरह विभाग में मात्र 255 निजी अस्पताल, निजी नर्सिंग होम, क्लीनिक और पैथोलॉजी संचालित हो रहे हैं, जो काफी कम हैं। जबकि इनसे अधिक जिले में अपंजीकृत अस्पताल, क्लीनिक और लैब संचालित हो रहे हैं। जहां कम पैसे में उपचार कराने के चक्कर में गरीब तबके के लोग अपंजीकृत के चक्कर में फंस जाते हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य अफसरों की साठगांठ के चलते जिले में 100 से अधिक क्लीनिक, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी लैब साठगांठ कर संचालित हो रहे हैं। गत वर्ष जिले में कई अपंजीकृत अस्पताल और क्लीनिक पर मरीजों की मौत के बाद हंगामा और प्रदर्शन हो चुके हैं।
मौत के बाद शिकायत मिलने पर नहीं होती कार्रवाई
जिले के किसी भी नर्सिंग होम में लापरवाही से मरीज की मौत के बाद शिकायत होने पर स्वास्थ्य अधिकारी जांच के नाम पर खानापूर्ति करते हैं। जांच के दौरान कभी भी न तो वीडियोग्राफी की जाती है, न फोटोग्राफी की जाती है। इतना ही नहीं मरीज के परिजनों और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज न किए जाने से मामला रफादफा हो जाता है। जबकि अगर कोई अप्रशिक्षित व्यक्ति चिकित्सा के नाम पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करता है तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का प्रावधान है। इसमें 10 से 15 साल तक की सजा और जुर्माना शामिल है। लेकिन जिले के चिकित्सा अधिकारी मामला दर्ज कराने से परहेज करते हैं।
नाम बदलकर शुरू कर देते हैं दुकान
जिले में अपंजीकृत चिकित्सकों का मजबूत जाल फैला हुआ है। एक जगह अपंजीकृत अस्पताल या क्लीनिक सील होने के बाद वह स्वास्थ्य अफसरों से साठगांठ कर पुन: नाम बदलकर क्लीनिक/अस्पताल सजाकर बैठ जाते हैं। इस माह में चार से अधिक मरीजों की उपचार के दौरान मौत होने पर हंगामा हो चुका है। जहां विभाग द्वारा मात्र ककोड़ और जहांगीराबाद के अस्पताल और क्लीनिक को सील करने की कार्रवाई की गई। अब संबंधित क्लीनिक ओर अस्पताल संचालक स्वास्थ्य अफसरों से साठगांठ करने में जुट गए हैं और प्रतिदिन सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
इस माह की घटनाएं
- एक सितंबर को पहासू क्षेत्र में 40 वर्षीय महिला की उपचार के दौरान मौत होने पर हुआ था हंगामा
- दो सितंबर को ककोड़ क्षेत्र में 48 वर्षीय महिला की उपचार के दौरान हुई थी मौत
- तीन सितंबर को ककोड़ क्षेत्र में 13 वर्षीय किशोर की उपचार के दौरान हुई मौत
- आठ सितंबर को जहांगीराबाद क्षेत्र में डिलीवरी के दौरान लापरवाही से नवजात की हुई मौत
शिकायत मिलने पर संबंधित अस्पताल पर कार्रवाई की जाती है। हाल ही में दो स्थानों पर क्लीनिक और अस्पताल सील किए गए हैं। संबंधित के दस्तावेज चेक किए जाएंगे। कार्रवाई होने वाले क्लीनिक और अस्पताल को साठगांठ से नहीं चलने दिया जाएगा।
- डॉ. भवतोष शंखधर, सीएमओ