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सहपत और डुंडूखेड़ा में दो हजार बीघा फसल हुई राख

Sat, 27 Apr 2019 10:23 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कैराना (शामली)
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फसल में आग (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा के खेतों की ओर से उठी चिंगारी से शनिवार को सहपत और डुंडूखेड़ा के किसानों की करीब दो हजार बीघा फसल राख हो गई। एसडीएम और सीओ के मौके पर पहुंचने के एक घंटे बाद चार दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।

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शनिवार को कैराना के खादर इलाके के ग्राम सहपत के जंगल में सुबह लगभग दस बजे आग फैल गई। देखते ही देखते तेज हवाओं के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग बुझाने के लिए किसान कहीं पानी तो कहीं हाथों में गन्ने के गोले तथा पेड़ों से गीले पत्तों की टहनियों से जद्दोजहद कर रहे थे, लेकिन आग किसी भी तरह काबू नहीं हो पा रही थी।

धीरे-धीरे आग आसपास जंगलों में फैल गई। सूचना पर एसडीएम डॉ. अमित पाल शर्मा, सीओ राजेश कुमार तिवारी, तहसीलदार रनबीर सिंह, कोतवाली प्रभारी राजेंद्र कुमार नागर फोर्स के साथ मौके पर पहुंची। कांधला पुलिस को भी मौके पर पहुंच गई। हालात देखकर अधिकारियों ने जिला मुख्यालय से दमकल विभाग की गाड़ियों को मौके पर आने को कहा। जिसके घंटेभर की देरी के बाद करीब चार गाड़ियां मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आग कांधला थानाक्षेत्र के ग्राम डुंडूखेड़ा के जंगल तक पहुंच चुकी थी।
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दमकल के साथ ही पुलिस ने भी किसानों के साथ मिलकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। पीड़ित किसानों का दावा है कि सहपत गांव में हरियाणा की ओर से ही आग की चिंगारी उठी थी, जिस कारण सब कुछ तबाह हो गया। किसानों की जहां गेहूं की फसल जलकर राख हो गई, तो वहीं झोंपड़ियां, खेत में पड़ा भूसा और अन्य कृषि यंत्र, ट्रैक्टर आदि भी स्वाह हो गए। किसानों ने बताया कि लगभग दो हजार बीघा फसल जली है। किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।

कहीं सीमा विवाद ने तो नहीं उजाड़ दिए किसान
आजादी के बाद सन 1976 में दीक्षित अवार्ड के तहत यूपी हरियाणा सीमा का बंटवारा हुआ था। तब दोनों प्रदेशों के बीच सीमांकन पिलर भी लगवाए गए थे लेकिन, निरंतर यमुना की जलधारा बदलने के साथ ही यूपी के किसानों की बहुत जमीन हरियाणा की ओर चली गई। यही कारण है कि दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच भूमि को लेकर खूनी विवाद छिड़ गया। कई बार गोलियां चल चुकी हैं। इसके बावजूद भी दोनों प्रदेशों के अधिकारी सीमा विवाद का हल नहीं निकाल सके हैं। शनिवार के अग्निकांड को देखते हुए सवाल यही खड़े हो रहे हैं कि कहीं सीमा विवाद के चलते तो किसी शरारती तत्व ने यूपी के किसानों की ओर से आग की चिंगारी तो नहीं छोड़ दी। इस अग्निकांड के चलते एक बार फिर सीमा पर तनाव की स्थिति बन गई है।

फूंक गए अरमान, तब जागा दमकल विभाग
अग्निकांड की सूचना के बावजूद भी लगभग चार घंटे बाद जिलेभर की अग्निशमन दल की करीब चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। तब तक आग इतनी बढ़ चुकी थी कि वहां तक दमकल के कर्मचारियों का पहुंचना भी मुश्किल हो रहा था। ऐसे में दमकल विभाग के खिलाफ भी किसानों में गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने खरी-खोटी भी सुनाई। बाद में दमकल विभाग ने आग का रुख भांपते हुए आगे से आगे जाकर डुंडूखेड़ा में आग पर काबू पाया।

रिपोर्ट बनाने में जुटा तहसील अमला
प्रशासन ने इस अग्निकांड को हालांकि गंभीरता से लेने का दावा किया है। बताया जा रहा है कि प्रशासन की ओर से लेखपालों की टीम को मौके पर भेजा गया है, जिनके द्वारा आग में हुई किसानों की क्षति की रिपोर्ट बनाई जा रही है। रिपोर्ट मुकम्मल होने के बाद उसे प्रशासन को सौंपी जाएगी।
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बोले अनिल चौहान, पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा
भाजपा के वरिष्ठ नेता अनिल चौहान भी अग्निकांड के दौरान मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसानों को आश्वासन देते हुए कहा कि जितना नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कराई जाएगी। प्रशासन को जिन किसानों की क्षति हुई है, उनकी रिपोर्ट बनाने को कहा गया है। हर पीड़ित किसान को मुआवजा दिलाया जाएगा। उन्होंने इस अग्निकांड पर गहरा दु:ख भी जताया है।

क्या कहते हैं एसडीएम
एसडीएम डॉ. अमित पाल शर्मा का कहना है कि जिले में कई जगह अग्निकांड के चलते मौके पर दमकल की गाड़ियां आने में देर लगी। वह सूचना पर अधीनस्थ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए। आग से जली फसलों का आंकलन कराया जा रहा है। साथ ही, दमकल विभाग की गाड़ियों को भी फिलहाल मौके पर ही रहने के निर्देश दिए गए हैं।

सहपत गांव में इन किसानों का हुआ नुकसान
नाम                फसल क्षति
अवतार सिंह          150 बीघा
शिवकुमार            7 बीघा
विनोद               30 बीघा
रमेश                10 बीघा
जिला पंडित        20 बीघा
हारून                20 बीघा
सतीश                20 बीघा
पिंटू                  20 बीघा
क्रेशन                 12 बीघा
सुरेश                  10 बीघा
रामकुमार               25 बीघा
इंद्रपाल                 30 बीघा
तेलू पंडित              20 बीघा
रामपाल                25 बीघा
इष्मा                  20 बीघा
शिवचरण               10 बीघा
सुभाष                  7 बीघा
सुंदर                   17 बीघा
ओमपाल                15 बीघा
बिजेंद्र                  15 बीघा
रविंद्र                   10 बीघा
ब्रह्म सिंह                15 बीघा
खड़क सिंह               15 बीघा
कृष्ण                   20 बीघा
पाल कलीराम             25 बीघा
चूहड़ सिंह                25 बीघा
महेंद्र                    16 बीघा
धर्मपाल                  10 बीघा
छांगा                    10 बीघा
ऋषिपाल                 12 बीघा
सेठपाल                  10 बीघा
पदम सिंह                10 बीघा
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