एक तरफ देश में तीन तलाक के मुद्दे पर केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में देशव्यापी बहस चल रही है, वहीं देवबंदी और बरेलवी उलेमाओं के अलग-अलग फतवों ने नगर के एक दंपति को उलझन में डाल दिया है।
महिला देवबंदी ख्यालात से इत्तेफाक रखती है, जबकि उसका शौहर बरेलवी ख्यालात से इत्तेफाक रखता है। अलग-अलग फतवों ने दोनों के बीच विचारधारा को लेकर तकरार और बढ़ा दी है।
मुस्लिम दंपति ने अलग-अलग राय का फतवा जारी करने पर आपत्ति जताते हुए उलेमाओं के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर कार्रवाई व न्याय दिलाने की मांग की है।
कस्बे के मोहल्ला न्यू पाठक में शकील अहमद रहते हैं। शकील ने बताया कि उनका निकाह 12 जुलाई वर्ष 2004 में सितारा बेगम से हुआ था। निकाह के बाद कुछ समय तक खुशहाल जीवन व्यतीत हुआ।
बाद में पता चला कि सितारा बेगम देवबंदी ख्यालात की हैं, जबकि वह बरेलवी ख्यालात से इत्तेफाक रखते हैं। ताजिए में भाग लेना, मजार पर चादर चढ़ाना जैसे कुछ मुद्दे देवबंदी और बरेलवी विचारधाराओं में एक-दूसरे के विपरीत हैं।
इन मुद्दों को लेकर सितारा बेगम ने जब अपने शौहर शकील अहमद को देवबंदी ख्यालात का हवाला देते हुए रोकने का प्रयास किया तो दोनों के बीच तकरार बढ़ने लगी। हालात यहां तक आ गए कि अलग-अलग ख्यालातों को लेकर दोनों के बीच रोजाना क्लेश होने लगा।
इस मुश्किल से निजात पाने के लिए दोनों के बीच सहमति बनी कि क्यों न अपने-अपने ख्यालात के उलेमाओं को पत्र लिखकर राय ले ली जाए। सहमति के आधार पर शकील अहमद ने बरेलवी और सितारा बेगम ने देवबंदी उलेमाओं को पत्र लिखा।
बरेलवी उलेमाओं ने शकील के निकाह को ही नाजायज ठहराते हुए महिला को बरेलवी ख्यालात अपनाने के बाद दोबारा निकाह करने का फतवा जारी कर दिया। वहीं, देवबंदी उलेमाओं ने फतवे में कहा कि वह किसी तरह अपने शौहर को बरेलवी ख्यालात से निकालकर देवबंदी ख्यालात में लाने के लिए जुदाई की सीमा तक लगातार प्रयास करें।
दोनों उलेमाओं के अलग-अलग फतवों से दोनों की समस्या का समाधान तो निकल न सका, उलटा दोबारा निकाह और जुदाई तक लगातार प्रयास करते रहने के फतवे दंपति के सामने आ गए। इन फतवों से दंपति बुरी तरह जहां उलझ गया है, वहीं तकरार और बढ़ गई है।
फतवों के बावजूद दोनों साथ रहने की जिद पर अड़े हैं। पत्नी की सहमति पर शौहर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में फतवों की कॉपी भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। साथ ही दोनों विचार धाराओं के उलेमाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है। पत्र में तर्क दिया है कि जब देवबंदी और बरेलवी उलेमा इमामे आजम की पैरवी करते हैं तो दोनों ने एक ही मसले पर अलग-अलग राय क्यों जारी की है।