कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में कागजों पर तो सुविधाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन धरातल से नदारद हैं। जिला अस्पताल में इमरजेंसी कक्ष के अलावा आठ से अधिक वार्ड हैं, जहां पर लगभग 20 स्ट्रेचर होने चाहिए। लेकिन अस्पताल में तीन-चार स्ट्रेचर और दो व्हील चेयर नजर आती है। इनमें भी अधिकांश की हालत खराब हुई पड़ी है।
स्ट्रेचर न होने के कारण इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को तीमारदार गोद में उठाकर लाते हैं और वार्डों तक भी ऐसे ही ले जाना पड़ता है। वहीं स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के चलते तीमारदारों को ही मरीजों को पकड़ कर वार्ड तक ले जाना पड़ता है।
शनिवार को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती खुर्जा निवासी मरीज देवेश का एक्स-रे कराने के लिए परिजन एक स्ट्रेचर ढूंढ़कर लेकर आए। जिस पर मरीज को लेटाकर एक्स-रे कक्ष तक पहुंचाया गया। इसमें एक पहिया टूटा होने के कारण दो कर्मचारी भी सहयोग के लिए पहुंच गए। एक्स-रे कक्ष से लाते समय एक पहिया न होने के कारण मरीज गिरते-गिरते बचा। इसके अलावा सुभाष अपनी मां को स्ट्रेचर पर ले जाने के लिए व्हील चेयर लेकर आया, जो टूटी होने के कारण अपनी मां को पीठ पर लादकर ले गया।
स्ट्रेचर न मिलने पर अक्सर कर्मियों से होती है नोंकझोक
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अक्सर गंभीर हालत के मरीज भी पहुंचते हैं। गंभीर हालत में इमरजेंसी कक्ष में आने वाले मरीजों के तीमारदार स्ट्रेचर न मिलने पर स्वास्थ्य कर्मियों से भिड़ जाते हैं और अभद्रता भी करते हैं। लेकिन जिम्मेदारों द्वारा समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा। जबकि मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य आए दिन अस्पताल का निरीक्षण करती रहती हैं।
अस्पताल में जो भी टूटे हुए स्ट्रेचर हैं उन्हें जल्द सही करवा दिया जाएगा। स्ट्रेचर को तीमारदार प्रयोग में लेने के बाद कहीं भी छोड़ देते हैं। सही जगह पहुंचा दें तो अधिक मरीजों को लाभ मिल सकेगा।
- डॉ. प्रदीप राणा, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल