बुलंदशहर। जिला न्यायाधीश की कोर्ट ने मिलावटी मिठाई बेचने के मामले में तीन दुकानदारों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। 15 साल की लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट प्रकरण में फैसला सुनाया है।
14 जनवरी 2010 को नगर पालिका के खाद्य निरीक्षक राजीव मिश्रा ने शिवम चौराहा स्थित तेजवीर सिंह की ज्योति स्वीट्स नामक दुकान से छेना से बनी बंगाली मिठाई का रंग समेत नमूना लेकर जांच के लिए भेजा था। इसके अलावा भवन रोड देवीपुरा निवासी शिव कुमार गुप्ता व राकेश कुमार गुप्ता की दुकान से बालूशाही का नमूना जांच के लिए भेजा था।
तेजवीर सिंह की दुकान से लिए गए नमूने की प्रयोगशाला में जांच के दौरान रोडामाइन बी नामक कृत्रिम रंग पाया गया था। इस रंग का प्रयोग आमतौर पर कपड़ा, कागज, पेंट व चमड़े में छपाई व रंगाई के लिए किया जाता है। इसके सेवन से लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।
शिव कुमार गुप्ता व राकेश कुमार गुप्ता की दुकान से लिए गए बालूशाही के नमूने की जांच में कृत्रिम खाद्य रंग मैटेलिन यलो पाया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर अधिकारियों ने दुकानदारों के खिलाफ नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच अधिकारी ने प्रकरण की जांच करते हुए कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था।
कार्रवाई के दौरान 13 अक्तूबर 2020 को आरोपी तेजवीर कोर्ट में पेश नहीं हुआ था। इसके चलते आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। बाद में नगर पुलिस ने 16 अक्तूबर 2020 को तेजवीर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था।
अब 15 साल बाद जिला न्यायाधीश मंजीत सिंह श्योराण की कोर्ट ने सुनवाई करते हुए शिवकुमार गुप्ता व उसके भाई राकेश कुमार गुप्ता के साथ तेजवीर सिंह को मिलावटखोरी का दोषी पाते हुए तीन-तीन साल की सजा और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।