जहांगीराबाद। वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव के दौरान जहांगीराबाद में हुए बहुचर्चित बूथ कैप्चरिंग और बलवे के मामले में 34 वर्ष बाद न्याय की मुहर लगी है। एसीजे जेडी–9 कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद तीन अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए 1200-1200 रुपये अर्थदंड और न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई है। फैसले के साथ ही यह मामला एक बार फिर जिले के राजनीतिक इतिहास में चर्चा का विषय बन गया है।
20 मई 1991 को जनता इंटर कॉलेज स्थित मतदान केंद्र पर एक प्रत्याशी के समर्थन में हथियारों के बल पर बूथ कैप्चरिंग की गई थी। अराजक तत्वों ने मतपेटियों को आग के हवाले कर दिया था, जिससे पूरे नगर में अफरा-तफरी मच गई थी। हालात बेकाबू होने पर प्रशासन को चुनाव स्थगित करना पड़ा था।
इस मामले में तत्कालीन पीठासीन अधिकारी श्याम बाबू भटनागर ने 40 लोगों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तभी से यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन चला आ रहा था। न्यायालय ने लक्ष्मी नारायण निवासी गहना, अलीम उर्फ गुड्डू निवासी पुख्ता बाजार और अरशद निवासी वंशीधर, हाल पता लाजपत नगर गाजियाबाद को दोषी करार दिया।