चुनावी माहौल में यदि आप ज्यादा नकदी साथ लेकर घर से निकल रहे हैं तो साथ में उसका पूरा हिसाब भी अपने साथ रखें। ऐसा नहीं करने पर आयकर विभाग या निर्वाचन विभाग की टीम आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। यदि आपके पास नकदी का पूरा हिसाब है तो इसे तीन से सात दिन में आसानी से जारी कराया जा सकता है।
आचार संहिता के दौरान यदि 10 लाख से ज्यादा का कैश पकड़ा जाता है तो मामला आयकर विभाग के पास जाएगा। यदि आयकर विभाग आपका कैश जब्त करता है तो इसे जारी कराने के लिए आपको पूरा हिसाब-किताब देना होगा। आयकर अधिकारी का कहना है कि कैश मिलना कोई अपराध नहीं है।
व्यापारी या कोई अन्य व्यक्ति इस बात से न डरे कि यदि वह कैश लेकर चलेगा और पकड़ा गया तो अपराध हो जाएगा। कैश पकड़े जाने पर कोई लंबी प्रक्रिया से भी नहीं गुजरना पड़ेगा। यदि किसी कारोबारी पर कैश पकड़ा जाता है तो कारोबारी को दस्तावेजों में उसका हिसाब किताब दिखाना होगा।
यदि कैश बैंक से निकलता है तो बैंक की एंट्री। किसी से वसूला गया है तो इसका लिखित में प्रमाणिक ब्योरा और बिल विभाग को देने होंगे। विभागीय अफसर उस दस्तावेज की जांच करेंगे। तीन से चार दिन में जांच पूरी कर यदि सब कुछ ठीक मिलता है तो सात दिन के भीतर कैश जारी कर दिया जाएगा। यदि जांच में गड़बड़ पाई गई तो नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई होगी।
कैश वैनों के लिए यह है नियम
तय गाइडलाइंस के मुताबिक आउटसोर्स की गई एजेंसी किसी बाहरी फर्म या व्यक्ति का कैश लेकर नहीं जाएगी। कैश से संबंधित दस्तावेज बैंक से जारी होंगे, जिन्हें साथ लेकर चलना होगा।
आउटसोर्स की गई एजेंसी के स्टाफ को आईकार्ड साथ रखना होगा।
एटीएम में कैश डालने और ब्रांच व चेस्ट को कैश भेजने पर भी नियम लागू होगा।
कैश वैन पकड़े जाने पर निर्वाचन अधिकारी भौतिक सत्यापन भी करेंगे। एटीएम, ब्रांच या चेस्ट में कैश छोड़ने या वहां से उठाने के दस्तावेज भी साथ रखने होंगे।