संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। नेशनल हाईवे-34 पर बने खतरनाक कट के कारण प्रतिमाह लगभग 70 हादसे हो रहे हैं। स्थिति यह है कि इसके बाद भी इन कटों पर फ्लाईओवर बनाने के लिए अब तक डीपीआर भी तैयार नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने में करीब छह माह का समय और लगेगा।
गाजियाबाद से अलीगढ़ तक नेशनल हाईवे-34 को सिक्स लेन किया जा रहा है। चौड़ीकरण का 80 फीसदी से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। नेशनल हाईवे पर बने ब्लैक स्पॉट को चिन्हित किए हुए करीब छह माह का समय बीत गया है लेकिन, अब तक फ्लाईओवर बनाने के लिए काम शुरू नहीं किया जा सका है। स्थिति यह है कि प्रतिमाह औसतन 70 से अधिक हादसे नेशनल हाईवे 34 पर हो रहे हैं। हाईवे पर बने अवैध कट भी हादसे का कारण बन रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी न तो फ्लाईओवर बनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो सकी है और न ही अवैध कट को बंद करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए हैं। पिछले एक माह में जिले की सीमा में नेशनल हाईवे पर कुल 67 हादसे हुए हैं। इनमें 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 63 लोग घायल हुए हैं। लगातार हो रहे हादसों को रोकने के लिए न तो एनएचएआई के अधिकारियों ने कोई ठोस कदम उठाया है और न ही हाईवे पर ब्लैक स्पॉट को लेकर संकेतक लगाए गए हैं।
कुल 11 स्थानों पर बनाए जाने हैं फ्लाईओवर
बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर और अलीगढ़ जिले से गुजरने के दौरान नेशनल हाईवे 34 पर एनएचएआई अधिकारियों ने कुल 11 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए थे। जिले में जहां सिकंदराबाद के कट नंबर चार, सिकंदराबाद बाईपास, मामन चुंगी, शिकारपुर कट और खुर्जा के कैलाश अस्पताल पर फ्लाईओवर बनाने की योजना थी, वहीं, गौतमबुद्धनगर जिले में केआर बीएल मिल, बिसरख मोड़ और धूम मानिकपुर तथा अलीगढ़ में दौरऊ मोड़, चपकौली और खेरेश्वर चौराहे को ब्लैक स्पॉट चिन्हित करते हुए फ्लाईओवर बनाने की योजना तैयार की गई थी।
मामन चुंगी, अड़ौली चौराहा और सिकंदराबाद में होते हैं हादसे
नेशनल हाईवे 34 पर हुए कुल हादसों में से 70 फीसदी हादसे मामन चुंगी, अड़ौली तिराहा और सिकंदराबाद क्षेत्र में होते हैं। मामन रोड से आने वाले वाहनों को बुलंदशहर की ओर आने के लिए रॉंग साइड से होते हुए कट पहुंचना पड़ता है। साथ ही खुर्जा की ओऱ से मामन रोड जाने वाले वाहनों को भी रॉंग साइड आना पड़ता है, जिसके चलते बड़ी संख्या में हादसे हो रहे हैं।
ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने का तरीका
राष्ट्रीय राजमार्ग पर जहां भी तीन वर्षों में पांच या इससे अधिक सड़क हादसे होते हैं और इन हादसों में पांच से अधिक लोगों की मौत होती है या घायल होते हैं तो ऐसे स्थान को ब्लैक स्पॉट चिन्हित किया जाता है। साथ ही यदि किसी स्थान पर एक बार हादसा होता है और फिर तीन साल तक हादसा नहीं होता है तो वह ब्लैक स्पॉट की श्रेणी से बाहर कर दिया जाता है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक आरके कौशिक ने कहा कि नेशनल हाईवे-34 पर कुल 11 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। इन ब्लैक स्पॉट पर फ्लाईओवर बनाने के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। अभी फ्लाईओवर निर्माण शुरू के लिए करीब छह माह का समय लगेगा।