बुलंदशहर। बिजली चोरी की शिकायत करना एक उपभोक्ता को भारी पड़ गया। ऊर्जा निगम की टीम ने बिजली चोरी के मामले में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट तो दर्ज कराई, लेकिन शिकायतकर्ता के खिलाफ भी 1.44 लाख रुपये का डिमांड नोटिस जारी कर दिया। अब उपभोक्ता आयोग ने मामले में सुनवाई करते हुए एसडीओ-जेई पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए 1.44 लाख रुपये के नोटिस को रद्द करने का आदेश दिया है। साथ ही जुर्माने की राशि दोनों अधिकारियों के वेतन से काटने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है।
न्यायालय जिला उपभोक्ता आयोग के जन सूचना अधिकारी शेखर वर्मा ने बताया कि जहांगीराबाद के गांव जसर निवासी वेदप्रकाश ने खेतों की सिंचाई के लिए ऊर्जा निगम से कनेक्शन लेकर ट्यूबवेल संचालित किया हुआ है। जबकि पड़ोसी किसान की ओर से उनके खंभे से अवैध रूप से तार डालकर सिंचाई की जा रही थी।
मामले में जून 2019 में वेदप्रकाश ने ऊर्जा निगम के अधिकारियों को फोन कर बिजली चोरी पकड़वाई। आरोप है कि एसडीओ-जेई ने मौके पर पहुंचकर आरोपी किसान को बिजली चोरी करते पकड़ा था। आरोप लगाया कि ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए 29 जुलाई 2019 को 1,44,681 रुपये का एक डिमांड नोटिस वेदप्रकाश के नाम जारी कर दिया।
इसके लिए पांच अक्तूबर 2019 को उन्होंने जबाव दिया और अधिशासी अभियंता जहांगीराबाद से मिलकर इस डिमांड नोटिस को गलत बताया और नोटिस को रद्द करने की मांग की। ऊर्जा निगम के अधिकारियों से कोई राहत न मिलने पर वेदप्रकाश ने दिसंबर 2019 में उपभोक्ता आयोग की शरण ली। अब उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष/न्यायाधीश हसनैन कुरैशी, सदस्य मोहित कुमार त्यागी व महिला सदस्य नीलम कुमारी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
इस दौरान पाया कि ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने अवैध रूप से वेदप्रकाश के खिलाफ कार्रवाई की थी। ऐसे में उन्होंने डिमांड नोटिस को रद्द करने के आदेश देते हुए मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 50 हजार और वाद व्यय के लिए 10 हजार रुपये पीड़ित को देने के आदेश दिए हैं।