बुलंदशहर। आतिशबाजी के खतरनाक धुएं और सड़कों पर उड़ने वाली धूल से अब लोगों का दम घुटने लगा है। सांस, हृदय रोगियों के साथ ही गर्भ में पल रहे शिशुओं की सेहत के लिए भी यह वातावरण खतरनाक है। बुधवार को शहर का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 282 और खुर्जा का 195 गया। मापा गया। देश के सबसे प्रदूषित 264 शहरों में बुलंदशहर 23वें नंबर पर रहा।
वायु प्रदूषण रोकने के लिए जिले में ग्रेप का दूसरा चरण लागू है। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी कार्य योजना तैयार कर करीब 19 विभागों को जिम्मेदारी सौंपी है। बावजूद इसके प्रतिदिन सड़कों पर कूड़ा-कचरा जल रहा है। धूल उड़ रही है और सड़कों के किनारे निर्माण कार्य भी हो रहा है।
इन सभी पर रोक न लगने के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार नहीं दिख रहा। नगर निवासी मोहित गर्ग ने बताया कि सुबह टहलने के दौरान खांसी व गले में खराश की समस्या हो गई। खांसते-खांसते आंखों में भी दर्द महसूस हो रहा है।
हर साल दिवाली के बाद बिगड़ते हैं हालात : दिवाली के बाद प्रतिवर्ष हवा की सेहत बिगड़ जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक हवा का प्रवाह थमते ही प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। बुधवार सुबह हवा का प्रवाह कम रहा। इसकी वजह से भी प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।