सादगीपूर्ण शादी के बाद वर-वधू को आशीर्वाद देते उनके माता-पिता।
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न कोई बैंडबाजा और न ही कोई तामझाम। गांव में ही घर के बाहर लड़का-लड़की ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाई। इसके बाद घर में ही पंडित ने दोनों के फेरे पढ़वाकर उन्हें जीवन साथी बना दिया। इस दरम्यान उपस्थित घरातियों और बारातियों को सिर्फ चाय पिलाई गई।
ऐसी सादगीपूर्ण शादी हुई जहांगीराबाद के गांव जलीलपुर में, जिसकी पहल खुद दूल्हे के पिता ने की। खास बात यह कि शादी में बैंक से ढाई लाख रुपये निकालने की छूट के बावजूद न तो लड़का पक्ष और न ही लड़की पक्ष की तरफ से बैंक से पैसे निकालने के लिए कोई पहल की गई।
जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव जलीलपुर निवासी बिजेन्द्र सिंह ने अपने बेटे दिनेश की शादी जिला जेपीनगर के गांव गुरैठा खादर निवासी कालीचरण की बेटी बबीता के साथ तय की थी। जिस समय शादी तय की गई, उस समय नोटबंदी का फैसला नहीं हुआ था। दोनों परिवार धूमधाम से शादी करते, लेकिन इसी दौरान सरकार ने नोटबंदी का फैसला ले लिया।
लड़के के पिता बिजेन्द्र सिंह ने प्रधानमंत्री के फैसले का समर्थन करते हुए सादगीपूर्ण तरीके से अपने बेटे की शादी करने का फैसला किया। उन्होंने लड़की के पिता कालीचरण को पैसे की वजह से परेशान न होने के लिए फोन किया।
उन्होंने कहा कि आप उनके गांव जलीलपुर में अपने परिजनों के साथ आएं और शादी सादगी से की जाएगी। चार दिसंबर को लड़की पक्ष के लोग जलीलपुर आए। लड़का पक्ष की तरफ से भी रिश्तेदार और अन्य लोग गांव पहुंचे। बाराती और घराती का स्वागत सिर्फ चाय से किया गया।