रात में सड़कों को रोशन करने में पालिका अफसरों ने 1.15 करोड़ घपला कर डाला। ब्रांडेड की कीमत पर लोकल लाइटें खरीदीं। साथ ही खराब होने पर लाइटें बदल पुरानी लाइटों को निर्देशित कंपनी को नहीं सौंपा।
शिकायत पर हुई जांच में सारा खेल खुल गया। अब अफसरों से जवाब तलब किया जा रहा है। नगर क्षेत्र में 1000 लाइटें लगवाई गई थीं। इनमें 750 हाईमास्क लाइटें जिनकी कीमत 8000 रुपये प्रति लाइट और 250 एलईडी लाइट जिनकी कीमत 22000 रुपये प्रति लाइट है।
आरोप थे कि अधिकांश लाइटें एक साल की समयावधि से पहले ही फुंक चुकी हैं। ईओ ने जांच कराई तो पता चला कि अधिकांश लाइटों को पालिका द्वारा चिह्नित स्थानों पर लगाया ही नहीं गया।
अधिकांश लाइटें सभासद और उनके जानने वालों के घरों के बाहर लगी मिलीं। कुछ सभासद तो ऐसे भी थे, जिनकी गली में इन लाइटों की भरमार थी। खास बात ये रही कि जो लाइटें सभासदों के घर के बाहर लगी थीं, वह चलती भी मिली और ओरिजनल भी।
जो लाइटें पालिका के चिह्नित स्थानों पर लगी थीं, उनमें से अधिकांश बंद मिली और लोकल भी। ईओ के निर्देश पर कई लाइटों को उतरवाकर रख लिया गया है। बताया जा रहा है कि नियमों के विरुद्ध लाइट लगाने वाले ठेकेदार पर ईओ की गाज गिर सकती है।
ये कौन सी कंपनी है
ईओ के निर्देश पर उतरवाई गई लाइटों की कंपनी भी ऐसी मिली है, जिसे किसी ने शायद ही पहले सुना हो। यह लाइटें चाइना मेड थीं। इन लाइटों की गुणवत्ता भी एसटीमेट के अनुसार नहीं थी।
चेयरपर्सन की बढ़ी मुश्किलें
पालिका नियमों के विपरीत हुए करोड़ों के भुगतान में नगर पालिका चेयरपर्सन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शासन ने मामले में जांच बैठा दी है। सिटी मजिस्ट्रेट ने वित्त एवं लेखाधिकारी को तीन दिन के भीतर आख्या रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
इसके बाद रिपोर्ट डीएम के माध्यम से मंडलायुक्त को भेजी जाएगी। सभासद ऋषिपाल सिंह और सुनील शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि नगर पालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच के बावजूद चेयरपर्सन से रिकवरी और अधिकार सीज नहीं किए गए।
हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बैंच ने फैसला सुनाते हुए शासन को दो माह के भीतर मामले का निस्तारण करने का निर्देश दिया था। सभासदों द्वारा आरोप लगाया गया था कि चेयरपर्सन ने नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 96 का खुला उल्लंघन कर करीब 20 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
सभासदों की शिकायत पर मामले में शासन स्तर से जांच बैठा दी गई है। नगर मजिस्ट्रेट डीपी सिंह ने मामले की जांच वित्त एवं लेखाधिकारी सूरज कुमार को सौंपते हुए तीन दिन के भीतर आख्या मांगी है।
इसके बाद जांच आख्या को जिलाधिकारी के माध्यम से मंडलायुक्त को भेजा जाएगा।
नगर में सोडियम लाइट लगाने में जमकर मनमानी की गई है। अधिकांश लाइटें पालिका के चिह्नित स्थानों पर नहीं लगवाई गईं। ठेकेदार द्वारा मनमाने तरीके से लाइट लगवाई गईं। लाइटों की गुणवत्ता भी घटिया किस्म की पाई गई। - एके सिंह, ईओ, नगर पालिका
नगर मजिस्ट्रेट का पत्र प्राप्त हो चुका है। जल्द ही मामले की रिपोर्ट नगर मजिस्ट्रेट को सौंप दी जाएगी। - सूरज कुमार, वित्त एवं लेखाधिकारी
पालिका के कार्यों में किसी भी स्तर से अनियमितता नहीं बरती गई है। जांच के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। मेरे उपर राजनीतिक षडयंत्र के तहत आरोप लगाए गए हैं। - पिंकी गर्ग, चेयरपर्सन, नगर पालिका