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Bulandshahar News: हरे चारे की जगह पशुओं को खिला रहे भूसा, खेताें में अभी भी भरा पानी

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अनूपशहर/अहार/नरौरा। गंगा का बढ़ा जलस्तर अब कम होने लगा है। अभी भी खेतों में पानी भरा होने से खराब हो रही फसल को देख किसान चिंतित हैं। सबसे अधिक हरे चारे की फसल प्रभावित हुई है। हरा चारा न मिलने पर अब लोगों ने पशुओं को भूसा खिलाना शुरू कर दिया है। किसान शासन और प्रशासन से खराब हुई फसलों का मुआवजा मांग रहे हैं।
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छह दिन पहले गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा। इससे बाढ़ जैसे हालात बनने लगे। बढ़ा जल स्तर गंगा किनारे आबादी क्षेत्र और खेताें तक पहुंचा गया। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर गंगा किनारे घाट और खेतों पर जाने से रोक लगा दी थी। लगातार पानी बढ़ने से क्षेत्र के किसानों का काम प्रभावित हो गया तो फसल भी खराब होने लगी। पानी की जद में आई सबसे अधिक नुकसान हरे चारे वाली फसलों को हुआ। इसके साथ ही पशुओं को हरे चारे का संकट गहराने लगा। गंगा किनारे वाले गांवों के किसान अजीत, कुलदीप, समर सिंह और राजकुमार ने बताया कि रविवार को गंगा का पानी कम हो गया। लेकिन अभी भी खेतों में पानी भरा है। खेती का काम पूरी तरह से प्रभावित है। खेतों पर बने ट्यूबवेल में भी पानी भर जाने से काफी नुकसान हुआ है। पिछले करीब एक सप्ताह से खेतों में लगातार पानी भरा होने से सब्जी समेत हरे चारे की फसल लगभग पूरी तरह खराब हो चुकी है। गंगा खादर में पशुओं का चराना बंद हो गया है। हरे चारे की कमी के चलते अब लोग पशुओं को भूसा खिला रहे हैं। ऐसे में भूसा भी कुछ दिनों में कम होता जाएगा। आने वाले दिनों में चारे की कमी का सामना करना होगा। इससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। किसानों की मांग है कि खराब हुई फसलों का मुआवजा दिया जाए।

खतरे के निशान से नीचे आया जलस्तर
नरौरा बैराज पर रविवार को जल स्तर खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया। जल स्तर में गिरावट से प्रशासन के साथ ही ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है। सिंचाई विभाग हेडवर्क्स नरौरा के एसडीओ अंकित सिंह ने बताया कि रविवार को बैराज पर कुल पानी की आवक 1,96,645 क्यूसेक हो रही है। बैराज से नदी की डाउन स्ट्रीम में 1,81,902 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। जलस्तर में लगातार गिरावट है। अनूपशहर में भी पानी कम होने से गंगा घाट और आरती स्थल से पानी पीछे होने लगा है। गंगा का पानी कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। नगर वासियों के अनुसार पिछले कई दिन से गंगा के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी से लग रहा था कि अब काफी दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अब पानी कम होने पर राहत की आस जगी है।
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