जैविक खेती करने से पहले होगी मिट्टी की जांच
बुलंदशहर। जनपद में जैविक खेती करने से पहले मिट्टी की जांच होगी। गंगा किनारे क्षेत्र की भूमि से कृषि अधिकारियों ने करीब 1100 से अधिक सैंपल लिए हैं। सभी सैंपल मृदा जांच लैब भेजे गए हैं।
जिला भूमि संरक्षण अधिकारी डॉ. घनश्याम वर्मा ने बताया कि पिछले दिनों केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से जनपद में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना के तहत जमीन चिन्हित करने का आदेश मिला था। इसके लिए जनपद में गंगा किनारे बसे 39 गांवों की 10 हजार हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के लिए चिन्हित किया गया था। इसके अलावा पांच हजार हेक्टेयर भूमि जनपद के अलग-अलग हिस्सों में जैविक खेती के लिए चिन्हित की गई है। कृषि विभाग की ओर से जनपद के खेतों की मिट्टी जांच कराने पर जिन तत्वों की कमी सामने आई है, उसे देखते हुए अब जनपद में जैविक खेती करने से पहले चिन्हित जमीन की जांच करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए गंगा किनारे की जमीन से करीब 1100 सैंपल लिए गए हैं। इन्हें जांच के लिए मृदा जांच लैब भेजा गया है। साथ ही अन्य चिन्हित भूमि से भी मिट्टी के सैंपल लिए जा रहे हैं।
जिंक, आयरन की है कमी
जनपद में पिछले दिनों खेतों की मिट्टी के सैंपल लिए गए थे। अधिकारियों के अनुसार यूरिया और डीएपी की अधिक मात्रा मिलने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। इसका असर खेती की पैदावार भी पड़ सकता है। मिट्टी में उपज बढ़ाने वाले जीवांश कार्बन, सल्फर, जिंक, आयरन, मैग्नीज जैसे तत्वों की काफी कमी मिली है। यही स्थिति रही तो लगातार मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती जाएगी। इसे लेकर कृषि विभाग के अधिकारी चिंतित हैं। उन्होंने उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए जरूरी निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसानों को आगाह किया है कि यूरिया और डीएपी के उपयोग से मिट्टी कमजोर होने लगी हे। ऐसे में पुरानी शैली से खेती करने की जरूरत है।
उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए यह करें किसान
कृषि उप निदेशक आरपी चौधरी और जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि यदि भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना है तो फसल की बुआई से पहले मिट्टी की जांच करवाएं। हरी खाद के लिए खेत में ढेंचा पैदा करें। गोबर की खाद दें। वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करें। एक ही खेती नहीं, अलग-अलग फसल चक्र अपनाएं। बेसन, गुड़, पानी, गाय के गोबर से बीजामृत बनाएं। फसल में छिड़काव के लिए गाय के मूत्र, आक व छाछ के मिश्रण का प्रयोग करें। जिला भूमि संरक्षण अधिकारी डॉ. घनश्याम सिंह का कहना है कि जनपद की भूमि में उर्वरा शक्ति कम होने का कारण यूरिया और डीएपी आदि दवाओं का प्रयोग अधिक है। इससे शुरूआत में पैदावार बढ़ती है, लेकिन साल दर साल मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती जाती है। भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए किसानों को हरी और गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए।