कोतवाली नगर क्षेत्र स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में बैंक के ही जिम्मेदार अधिकारियों और बैंक मित्र ने मिलकर करीब 50 खाताधारकों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल दिया। साइबर थाना पुलिस और स्वाट टीम देहात ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 25 हजार रुपये के इनामी बैंक मित्र और शाखा प्रबंधक सहित छह शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। ठगों ने धोखाधड़ी से 1.25 करोड़ रुपये की राशि अपने परिजनों और मित्रों के खातों में ट्रांसफर कर ली थी।
11 दिसंबर 2025 को पीएनबी की केएसजीए शाखा की प्रबंधक पिंकी रानी ने साइबर थाने में तहरीर दी। उन्होंने बताया कि कई खाताधारकों ने शिकायत की है कि उनके खातों से उनकी जानकारी के बिना मोटी रकम गायब हो गई है। पुलिस ने जब जांच शुरू की तो परत दर परत बैंक के अंदर चल रहा काला खेल सामने आता गया। एसएसपी के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध) के नेतृत्व में साइबर सेल ने तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला। जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी आकाश कुमार, जो वर्ष 2022 से बैंक मित्र के रूप में कार्यरत था, बैंक के भीतर बैठकर ही ठगी का जाल बुन रहा था।
वह ग्राहकों को एफडी कराने का झांसा देता था, लेकिन असल में वह पैसा एफडी में जमा न होकर उसके निजी सिंडिकेट के खातों में जा रहा था। पूछताछ में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इस पूरे खेल में बैंक मैनेजर अजय कुमार पासवान की संलिप्तता थी। बैंक मित्र आकाश ने कुबूल किया कि वह बैंक अधिकारियों की आईडी का उपयोग कर बिना किसी वाउचर या चेक के ग्राहकों के खातों से पैसे डेबिट कर देता था। इस काली कमाई का एक हिस्सा वह मैनेजर अजय पासवान को नगद कमीशन के रूप में देता था।
ठगी गई राशि को आरोपी अपनी माता, पिता, भाई और दोस्तों के खातों में ट्रांसफर कर देते थे। ट्रांजेक्शन की एंट्री में चालाकी से एफडीआर - ट्रांसफर लिख दिया जाता था। जिससे कि किसी को शक न हो। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने बैंक बिल्डिंग के किराए और बिजली बिल के सरकारी पैसे को भी नहीं बख्शा और उसे भी फर्जीवाड़े के जरिए हड़प लिया। पुलिस ने शुक्रवार को घेराबंदी कर 25 हजार के इनामी मुख्य आरोपी आकाश कुमार को उसके साथियों के साथ दबोच लिया।
अन्य आरोपियों की शिनाख्त अजय कुमार पासवान शाखा प्रबंधक, पीएनबी, सचिन कुमार बैंक मित्र का सहयोगी, रोचित कुमार सहयोगी, निर्भय सिंह मालयम सहयोगी, अनिकेत कुमार आकाश का भाई के रूप में हुई है। साथ ही पुलिस ने आरोपियों के पास से ठगी के फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें लैपटॉप, बायोमैट्रिक डिवाइस, पासबुक प्रिंटर, 14 रबर स्टाम्प, 22 फर्जी छपी हुई एफडी, 7 चेक बुक और बड़ी संख्या में जमा पर्चियां शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।