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स्याना हिंसा : छह साल में 124 में से 24 की हो पाई गवाही

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स्याना। गोकशी के बाद स्याना क्षेत्र के महाव गांव भड़की हिंसा छह साल बीत चुके हैं। घटना का विचारण एडीजे-12 की न्यायालय में चल रहा है। मामले में बनाए गए 124 गवाहों में से अब तक महज 24 की ही गवाही हो सकी है। घटना में जान गंवाने वाले स्याना के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की लाइसेंसी पिस्टल भी अभी तक पुलिस बरामद नहीं कर पाई है।
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तीन दिसंबर 2018 को गांव महाव के जंगल में गोकशी की घटना हुई थी। गुस्साए लोग जाम लगाकर जमकर हंगामा कर रहे थे। जाम खुलवाने के दौरान ग्रामीणों व पुलिस के बीच हुई भिड़ंत में गांव चिंगरावठी निवासी युवक सुमित और तत्कालीन स्याना इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की गोली लगने से मौत हो गई थी। मामले में स्याना कोतवाली में 27 नामजद और 50-60 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या, हिंसा समेत कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
एसआईटी की जांच के बाद स्याना, चिंगरावठी, महाव, हरवानपुर, नयाबांस, लौंगा, बरौली वासुदेवपुर, थल इनायतपुर गांव निवासी 45 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। हिंसा के दिन गोली लगने से मारे गए युवक सुमित का नाम भी शामिल था। पुलिस ने बजरंग दल के तत्कालीन जिला संयोजक योगेश राज समेत 44 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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इनमें सात आरोपियों की मौत हो चुकी है। पांच आरोपी नयाबांस निवासी योगेश राज, चिंगरावठी निवासी डेविड, जोनी, लोकेंद्र व राहुल अभी भी जेल में निरुद्ध हैं। 32 आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
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