जिला पंचायत के निर्माणाधीन मॉल में छापामारी कर पुलिस ने 1.10 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की। यह रकम 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट के रूप में मिली। सूचना देने पर भी जिला पंचायत कर्मचारी रकम को लेने नहीं पहुंचे। बाद में पुलिस ने यमुनापुरम स्थित पंजाब नेशनल बैंक में जिला पंचायत के खाते में इस रकम को जमा करवा दिया।
साथ ही मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी। सोमवार दोपहर करीब एक बजे पुलिस को सूचना मिली कि कालाआम चौराहे के पास निर्माणाधीन मॉल में कालाधन रखा है और रकम को कहीं ले जाया जा रहा है। पुलिस ने तुरंत निर्माणाधीन मॉल में छापा मारा। पुलिस को देख मॉल में बने एक कमरे में बैठा व्यक्ति भाग निकला।
चेकिंग में मौके से 500 और 1000 के नोटों से भरे दो बैग मिले। पुलिस के मुताबिक बरामद रकम 1.10 करोड़ निकली। पुलिस काफी देर तक जिला पंचायतकर्मियों को फोन कर बुलाती रही, लेकिन कोई भी नहीं आया। बाद में पुलिस ने रकम को पीएनबी में जिला पंचायत के खाते में जमा करा दिया।
एसपी देहात जगदीश शर्मा ने बताया कि जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी की देखरेख में यह पैसा जिला पंचायत के खाते में जमा करवाया गया है। इसकी एक रसीद सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई है। वहीं, पुलिस ने पूरे मामले की रिपोर्ट डीएम को भेज दी है। वहीं पैसा पकड़े जाने के बाद कुछ नेता सेटिंग में लगे रहे। पुलिस पर कई रसूखदारों और नेताओं के फोन भी पहुंचे, लेकिन पुलिस अफसरों ने किसी की नहीं सुनी।
कोट्स
मामला पुलिस, जिला पंचायत और बैंक के बीच का है। पैसा किसका है, इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। पुलिस ने पैसा बैंक में जमा करा दिया है।
- आंजनेय कुमार सिंह, डीएम, बुलंदशहर
जिला पंचायत के निर्माणाधीन मॉल के एक ऑफिस से छापेमारी में बरामद 1.10 करोड़ रुपये को लेकर दिनभर ड्रामा चला। पहले इस रुपये को लेकर किसी ने दावेदारी नहीं की और पैसा जांच के लिए पड़ा रहा। शाम को अचानक अपर मुख्य अधिकारी ने पैसा जिला पंचायत का होने का दावा कर कुछ रसीदें पेश की तो यह रुपया पुलिस और प्रशासन की देखरेख में जिला पंचायत के खाते में जमा कर दिया गया।
हालांकि यह रुपया मॉल में क्या कर रहा था, इसका जवाब पुलिस और प्रशासन के किसी अधिकारी के पास नहीं है। जिला पंचायत से बरामद 1.10 करोड़ रुपये किसके हैं और निर्माणाधीन मॉल में कैसे पहुंचे। इसे लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। मामले को लेकर दिनभर हड़कंप मचाए रहे पुलिस और प्रशासन शाम होते होते ढीले पड़ गए और उन्होंने मामले से किनारा करना शुरू कर दिया है।
एसपी देहात जगदीश शर्मा ने बताया कि शाम छह बजे अचानक जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी प्रदीप कुमार ने यह पैसा जिला पंचायत का होने दावा किया। अपर मुख्य अधिकारी ने इन रुपयों से संबंधित कुछ रसीदें पेश की है। उनका कहना है कि यह पैसा आवंटियों से वसूल गए दुकानों का किराया और टैक्स का है।
जिसकी रसीदें भी पुलिस और प्रशासन के समक्ष पेश कर दी गई्र हैं। पुलिस ने यह रसीदें सिटी मजिस्ट्रेट हिमांशु गौतम को दे दी है। क्योंकि अब इंकम टैक्स डिमार्टमेंट यह जांच करेगा कि यह पैसा कहां से आया। इतनी बड़ी रकम जिला पंचायत के निर्माणाधीन में कैसे पहुंची और वहां क्यों रखी गई। इसका जवाब अभी तक साफ-साफ कोई भी अधिकारी नहीं दे सका है।
हालांकि अपर मुख्य अधिकारी पैसा दुकानों का किराया और टैक्स बता रहे हैं, फिर भी पुलिस ने उनसे बरामद रसीदें सिटी मजिस्ट्रेट सौंपी दी है। ताकि यह पता चल सके कि इतनी बड़ी का स्रोत क्या है।