डॉ. तरुण कुमार
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अमेरिका के टेक्सास स्थित ए एंड एम विवि में तैनात परमाणु वैज्ञानिक को नजरबंद हुए तीन माह से अधिक समय बीत जाने पर भी कार्रवाई न होने पर हताश हो रहे परिजनों को मंगलवार दोपहर उस वक्त आशा की किरण नजर आई जब प्रधानमंत्री कार्यालय से आए फोन पर उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।
शिकारपुर निवासी डीएपी इंटर कॉलेज के रिटायर शिक्षक रामकिशन शर्मा के पुत्र डॉ. टीके शर्मा(तरुण कुमार) ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र से पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। जिसके बाद 2010 में ए एंड एम यूनिवर्सिटी टैक्सास अमेरिका में बतौर परमाणु वैज्ञानिक तैनात थे।
तरुण की मां गिरजेश शर्मा के अनुसार बेटे की योग्यता और रिसर्च को देखते हुए अमेरिकी रक्षा विभाग ने उन्हें अपने प्रोजेक्ट पर काम करने का न्यौता दिया था। जिससे चिढ़कर उसके साथियों ने अक्तूबर 2015 में नस्लवादी व्यवहार किया।
भ्रष्टाचार का विरोध करने पर षड़यंत्र के तहत उसपर काम पर ध्यान न देने व दुर्व्यवहार करने समेत कई आरोप लगाकर जेल भिजवा दिया। विवि द्वारा नौकरी से निकालने के फैसले के विरुद्ध वैज्ञानिक ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
संघीय न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवि को 350 मिलियन डालर (दो अरब चौंतीस करोड़ तेईस लाख पिचहत्तर हजार रुपये) देने का आदेश दिया। विवि प्रशासन ने न्यायालय द्वारा निर्धारित धनराशि को देने के बजाए 29 दिसंबर 2016 को उसे नजर बंद कर दिया।
टीके शर्मा की मां ने आरोप लगाया कि विवि प्रशासन और सोलिसिटर जनरल बेटे को पागल करार देने पर तुले हैं। बेटे को न्याय दिलाने और भारत लाने के लिए मदद के लिये बूढे़ माता-पिता प्रधानमंत्री आवास गए थे। उन्होंने वहां अपनी पीड़ा सुनाई थी। प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में उनके सचिवों ने उनकी बात को गहनता से सुना।
मां गिरजेश ने बताया कि मंगलवार को प्रधानमंत्री के सचिव का फोन आया था। सचिव ने घर के सभी सदस्यों से बात कीं और उनके बेटे को न्याय दिलाने के लिए भारत सरकार द्वारा हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।