प्रादेशिक विकास दल (पीआरडी) , युवा कल्याण विभाग व मेरठ रोडवेज के अफसरों की साठगांठ से फर्जी कागजात पर संविदा परिचालकों की भर्ती कर ली गई। अफसरों ने मेरठ रोडवेज में पीआरडी कोटे से उन युवाओं को रख लिया, जो पीआरडी के जवान थे ही नहीं। रोडवेज अफसरों ने पीआरडी के नाम पर छह लाख रुपये का मानदेय भी रिलीज कर दिया। विभाग में संबंधित जवानों का रिकार्ड ही नहीं है।
रोडवेज में संविदा परिचालकों के पद पर पीआरडी जवानों को भर्ती करने के आदेश 2015 में आए थे। इसके चलते बुलंदशहर पीआरडी और युवा कल्याण विभाग का संतुति पत्र लगाकर मेरठ रोडवेज में परिचालक के पद पर 85 युवाओं को नौकरी पर रख लिया गया।
इसकी सुगबुगाहट लखनऊ तक पहुंच गई। जांच में बुलंदशहर के पीआरडी और युवा कल्याण विभाग के साथ ही मेरठ रोडवेज के अफसरों की मिलीभगत सामने आई। इसके बाद सभी खुद को बचाने के चक्कर में लग गए।
युवा कल्याण एवं पीआरडी अफसर श्री निवास का कहना है कि मेरठ रोडवेज के अफसरों ने खुद को पाक साफ साबित करने के लिए 85 परिचालकों के मानदेय का ड्राफ्ट पीआरडी को भिजवा दिया। बुलंदशहर से ड्राफ्ट को यह कहते हुए लौटा दिया कि उक्त युवकों का पीआरडी जवानों के रूप में रिकार्ड ही नहीं है।
आरोप है कि मेरठ रोडवेज के अफसरों ने विभाग के एकाउंट में संविदाकर्मियों के वेतन के छह लाख रुपये जमा करा दिए। अफसरों को बैंक स्टेटमेंट से पता चला तो उन्होंने बैंक अफसरों से रुपये जमा कराने वाले शख्स को फोन कराया। उसने रुपये जमा कराने से ही इंकार कर दिया। अब बैंक ने उक्त राशि को सस्पेक्ट खाते में डाल दिया है।
सूत्रों का कहना है कि फर्जीवाड़ा कर लाखों रुपये इधर - उधर कराने वाला सिंडिकेट भर्ती कराने का काम करता था। अधिकारी अपने गुर्गों से फर्जी कागजात तैयार कराते थे और उसके बाद चहेतों को नौकरी पर रख लिया जाता था।