फीडर फर्जीवाड़े में फंसे अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फर्जीवाड़े में फंसे अफसरों के वेतन से रिकवरी की जा सकती है। यूपीपीसीएल के चेयरमैन ने एमडी को दोनों गबन के ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।
स्याना-किरोंठी लिंक लाइन में करीब 39 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा और अनूपशहर के जिनाई-सिरौरा बिजलीघर के फीडर निर्माण में करीब 11 लाख रुपये का घोटाला किया गया।
अफसरों की मिलीभगत से ठेकेदार ने स्टोर से सामान निकाल लिया, लेकिन फीडर और लिंक लाइन का निर्माण नहीं कराया गया।
मामला खुलने के बाद जांच हुई तो तत्कालीन एसई आरएस प्रसाद, तत्कालीन एक्सईएन जहांगीराबाद दिनेश यादवेन्दु, तत्कालीन एक्सईएन स्याना सुरेश चंद्रा, तत्कालीन एसडीओ राहुल गुप्ता और एक अन्य एसडीओ समेत दो जेई की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई।
मामले में स्याना कोतवाली और अनूपशहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। आरोपी ठेकेदार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच अधिकारी अधीक्षण अभियंता ने मामले की रिपोर्ट एमडी और चेयरमैन को भेज दी थी।
अब यूपीपीसीएल के चेयरमैन संजय अग्रवाल की तरफ से गबन हुए सामान का ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। ऑडिट के जरिये गबन हुए सामान की मूल कीमत को अफसरों के वेतन से वसूला जाएगा।
वहीं, फर्जीवाड़े की रिकवरी एसई और एक्सईएन स्तर से किए जाने की संभावना है। एसडीओ और बिजलीघर प्रभारियों ने अफसरों पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर कराने के आरोप लगाए थे।
फर्म के भुगतान से भी वसूली
आरोपी ठेकेदार की फर्म का पावर कारपोरेशन पर कुछ पैसा बकाया है। ऐसे में फर्म के भुगतान पर भी पहले ही रोक लगाई जा चुकी थी। फर्म के भुगतान से भी नुकसान की भरपाई की जाएगी।
गबन किए गए सामान का ऑडिट कराया जाएगा। सामान की मूल कीमत फर्म और अफसरों से वसूली जाएगी। फर्म का भुगतान पहले ही रोक दिया गया है। - राकेश कुशवाहा, अधीक्षण अभियंता