राग का वजूद बचाने के लिए अब प्रोफेशनल्स की मदद ली जाएगी। इतना ही नहीं गाय के दूध को बढ़ावा देने के लिए सरकार पशुपालकों को प्रतिलीटर चार रुपये प्रोत्साहन राशि देगी। प्रोत्साहन राशि दूध के रेट से अलग दी जाएगी।
जनपद में पराग पर बंदी का संकट मंडरा रहा है। पराग का दुग्ध कलेक्शन 24 हजार लीटर से घटकर पांच से छह हजार लीटर के बीच रह गया है। पराग कर्मचारियों को 16 माह से वेतन नहीं मिला है। हालत इतने बदतर हो चुके हैं कि पराग ने अपने 14 कर्मचारियों को वीआरएस पर भेज दिया है।
पराग की बदहाल व्यवस्था को संवारने के लिए दुग्ध विकास विभाग प्रोफेशनल्स की मदद लेगा। विभाग में ऐसे प्रोफेशनल्स को जगह दी जाएगी जो दुग्ध विकास की तकनीक में माहिर हों। डेयरी साइंस में बीटेक डिग्रीधारक युवाओं को प्राथमिकता मिलेगी, ताकि पराग के वजूद पर छाए संकट के बादलों को छांटा जा सके।