सुबह का वक्त और काली बस्ती के मर्द काम-धंधे के लिए घर से निकल चुके थे। घर पर बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग ही थे। आठ-सवा आठ बजे उन्हें गैस की गंध महसूस हुई। कुछ पलों में सांस रुकने लगी।
हड़बड़ाहट में वे घर से बाहर निकले तो वहां राहत मिलने के बजाए दिक्कत बढ़ गईं। दम घुटने लगा और आंखों में जलन होने लगीं। कइयों को तो उल्टियां होने लगीं। आधे घंटे तक ऐसा ही मंजर रहा। बस्ती में हड़कंप मच गया। लोग एक-दूसरे का हाल पूछने लगे। रिसाव की खबर फैली तो इलाके में अफरा-तफरी फैल गई।
अमोनिया गैस की जद में जैसे ही लोग आने शुरू हुए। उनको लगा जैसे थोड़ी देर में ही दम निकल जाएगा। लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। लोग सुरक्षित स्थान के लिए दौड़ पड़े। बता दें कि इस हादसे में सबसे अधिक परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को हुई।
पीड़ित अकबरी ने बताया कि अचानक गैस की गंध महसूस हुई तो लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए। शेर मोहम्मद ने बताया कि पहले तो कुछ समझ ही नहीं पाए। थोड़ी देर बाद बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों को उल्टियां होने लगीं। आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ होने लगी। तब लोग घर से बाहर सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे।
इरम (20) पत्नी सलमान, नसीम (45) पत्नी हारून, शबाना(25) पत्नी इरफान, इरफान(27), मीना (50) पत्नी मौमीन, फरहा(22) पत्नी हबीब, रेशमा (23), रहीसन (50), सायरा(55), शेर मोहम्मद (70) ने आंखों में जलन, सिरदर्द, उल्टियां की शिकायत की।
मोहल्लावासियों का कहना था कि अगर गैस रिसाव रात में होता तो लोगों की जिंदगी को खतरा हो सकता था। संयोगवश दिन में हादसा होने से लोगों को समय पर इलाज मुहैया हो गया। कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का मौका भी मिल गया।