दाम बढ़ने के इंतजार में रोका 1.63 लाख मीट्रिक टन आलू
बुलंदशहर। इस समय आलू पर मंदी चल रही है। दाम बढ़ने के इंतजार में किसानों ने करीब 1.63 लाख मीट्रिक टन आलू कोल्ड स्टोर में रोक कर रखा है। आलू के कारोबारियों का कहना है कि आलू की बाहर मांग नहीं होने से उचित दाम नहीं मिल रहा है। इसलिए किसान कोल्ड स्टोर से आलू नहीं निकाल रहे हैं। वहीं किसानों का कहना है कि इस बार आलू के दाम इतने कम हैं कि लागत मिलना भी मुश्किल दिख रहा है। दाम बढ़ने की उम्मीद में फिलहाल आलू कोल्ड स्टोर में ही सुरक्षित रखा है।
जनपद में इस बार 8500 हेक्टेयर से अधिक भूमि में आलू का उत्पादन हुआ। इस बार फसल भी अच्छी हुई तो किसानों को आस लगी कि दाम अच्छे मिलेंगे। इसे देखते हुए 37 कोल्ड स्टोर में 188853.85 क्षमता के सापेक्ष 174028.82 मीट्रिक टन आलू का भंडारण हुआ। लेकिन अभी तक 10459.13 मीट्रिक टन की निकासी हो सकी है, जबकि 163569.69 मीट्रिक टन आलू कोल्ड स्टोर में सुरक्षित है। अब दाम नहीं बढ़ने से किसान कोल्ड स्टोर से अपना आलू नहीं निकाल रहे हैं। दूसरी ओर कारोबारियों को भी आलू की बाहर मांग कम होने पर अपने कारोबार की चिंता सताने लगी है।
यह है आलू की स्थिति
- आलू की पैदावार: 8500 हेक्टेयर
- कुल कोल्ड स्टोर: 37
- कोल्ड स्टोर में आलू भंडारण की क्षमता: 188853.85 मीट्रिक टन
- कोल्ड स्टोर में कुल आलू भंडारण: 174028.82 मीट्रिक टन
- अभी तक कोल्ड स्टोर से हुई आलू निकासी: 10459.13 मीट्रिक टन
आलू की फसल में आने वाली लागत और पैदावार
एक बीघा आलू की फसल करने पर 10 से 12 हजार रुपये की लागत आती है। जबकि एक बीघा में 40 से 60 के बीच 50 किलो प्रति बोरी के हिसाब से आलू की पैदावार होती है। इस समय आलू का भाव 450 रुपये प्रति बोरी तक है और कोल्ड स्टोर में एक बोरी आलू रखने के लिए 150 रुपये लिए जाने का प्रावधान है। जबकि गत वर्ष आलू का दाम 1450 रुपये प्रति बोरी तक हो गया था।
बोले आलू उत्पादक किसान
इस बार आलू के दाम इतने मंदे हैं कि लागत भी नहीं मिल रही है। गत वर्ष आलू के दाम अच्छे मिले थे और इस बार भी ऐसी ही संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अब मांग और दाम कम होने के कारण चिंता सताने लगी है। - किसान अरविंद चौधरी।
इस बार आलू की फसल करके कुछ हाथ नहीं लगा। मंदी के चलते आलू कोल्ड स्टोर से नहीं निकाला जा रहा है। शासन को चाहिए कि आलू के दाम निर्धारित किए जाएं। साथ ही सब्सिडी दिए जाने का भी प्रावधान किया जाए। - किसान मोहित पाठक।
बोले आलू कारोबारी
एक तो आलू के दाम कम हैं। वहीं, दूसरी ओर बाहर आलू की मांग कम होने के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में किसानों के साथ कारोबारियों को भी नुकसान हो रहा है। - राकेश बंसल उर्फ छुट्टन, कारोबारी
गत वर्ष आलू के जिस तरह से दाम मिले थे, उसे देखकर किसानों ने फसल तैयार की। लेकिन इस समय आलू के दाम ने किसानों को नुकसान और कारोबारियों का काम भी लगभग चौपट कर दिया है। - ओमपाल माहुर, कारोबारी
जनपद के कोल्ड स्टोर में आलू भंडारण की कमी नहीं है लेकिन दाम कम होने के कारण अभी तक 6.01 फीसदी ही आलू की निकासी हो सकी है। किसान आलू के दाम बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। - डॉ. धीरेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी।