अब तालाबों में पहुंचेगा गांव का साफ पानी
बुलंदशहर। गांव से निकलने वाला गंदा पानी अब शुद्ध होकर तालाब में पहुंचेगा। इसकी शुरूआत गंगा किनारे वाले गांवों से होगी। इसके लिए गांव से एक किलोमीटर के दायरे वाले तालाब चिन्हित होंगे। नालियों में रोड़ी बिछाने के साथ कैली के पौधे लगाए जाएंगे। जिला पंचायती राज विभाग की ओर से यह पहल की जा रही है।
गांवों में घरों से निकलने वाला गंदा पानी तालाबों में जाता है। गंदे पानी को साफ करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाना एकमात्र उपाय है। पंचायत राज विभाग ने गंदे पानी को साफ कर उसे तालाबों में डालने का नया तरीका निकाला है। पहले चरण में गंगा किनारे के 32 गांवों में यह तरीका अपनाया जाएगा। नालियों से तालाबों में जाने वाले गंदे पानी को शुद्ध करने के लिए थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कैली के पेड़ लगाए जाएंगे। कैली के पौधे में गंदे पानी को फिल्टर करने की क्षमता होती है। यदि कुछ देर पानी पौधे के आसपास रुक जाए तो यह पूरी तरह से उसे फिल्टर कर देता है। पानी के जो दूषित कण होते हैं उन्हें यह पौधा सोख लेता है और उसके प्रदूषण को खत्म कर देता है। कैली के पौधे उस तालाब के चारों ओर भी लगाए जाएंगे, जहां पर गांव का पानी पहुंचाया जाएगा। पानी शुद्ध होने पर वह पशुओं व जंगली जानवरों के लिए पीने योग्य होगा। साथ ही किसान उस पानी का प्रयोग फसलों की सिंचाई करने में भी कर सकेंगे। विभाग के अनुसार इन पौधों को नालियों में लगाकर इनका पानी सीधे गांवों के तालाबों में डाला जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस कार्य की जल्द शुरूआत की जाएगी। इसके लिए गांव के ऐसे तालाबों को चयनित किया जा रहा है, जो गांव से करीब एक किलोमीटर के दायरे में हो। पानी तभी शुद्ध होगा, जब तालाब एक किलोमीटर की दूरी पर होगा।
पहले गंगा किनारे के गांवों में यह प्रयोग किया जाएगा। सफलता मिलने पर दूसरे गांवों में भी अपनाया जाएगा। इससे नालियों में बहने वाले गंदे पानी को शुद्ध कर उसे तालाबों में पहुंचाया जाएगा। कैली का एकमात्र ऐसा पौधा है जो गंदे पानी को शुद्ध करने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी शुरूआत करने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। - डा. प्रीतम सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी