बुलंदशहर। घर पर खेल रहे 12 साल के बच्चे पर पालतू पिटबुल कुत्ते ने हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया। बच्चे के शोर मचाने पर परिजनों ने किसी तरह से बचाया। बच्चे के दोनों पैरों पर तीन से चार टांके आए हैं। बच्चे की हालत गंभीर देख जिला अस्पताल से उसे दिल्ली हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।
गुलावठी क्षेत्र के गांव फकाना निवासी योगेंद्र सिंह ने तीन साल से पिटबुल कुत्ता पाल रखा है। उनका बेटा करन (12) घर में खेल रहा था। इसी दौरान पिटबुल ने अचानक करन पर हमला कर दिया। बच्चे की रोने और चीखने की आवाज पर परिजन पहुंचे तब जाकर उसकी जान बची। करन के दोनों पैरों पर पिटबुल ने कई जगह काटा है। जिला अस्पताल एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने के साथ ही जख्मी पैरों पर टांके लगाए गए। हादसे के बाद से बच्चा काफी सहमा हुआ है।
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पिटबुल के काटने का जिले में पहला मामला
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज उपाध्याय ने बताया कि जिलेभर में कुत्ते काटने के कई मामले सामने आ चुके हैं। प्रतिदिन 150 से अधिक लोग एंटी रैबीज लगवाने आते हैंं। पिटबुल के काटने का यह पहला मामला है। पिटबुल कुत्ते के काटने के बाद सभी को खून की जांच करवानी चाहिए। जांच रिपोर्ट में अगर कोई कमी पाई जाती है तो उपचार किया जा सकता है।
तीन साल से घर में रह रहा पिटबुल
गांव फकाना निवासी योगेंद्र सिंह के पड़ोसी सचिन ने बताया कि तीन साल से योगेंद्र सिंह ने पिटबुल पाल रखा था। इससे पहले भी एक-दो लोगों पर हमला बोला था लेकिन वह बच गए थे।
पिटबुल को पालने पर है पाबंदी
प्रशासन के पास आंकड़ा नहीं है कि जिले में कितने कुत्ते हैं और किस नस्ल के हैं। पिटबुल नस्ल के कुत्ते को पालने पर पाबंदी है। कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के कुत्ता नहीं पाल सकता। इनको पालने के लिए लाइसेंस लेना होता है। शासन ने पूर्व में पिटबुल के काटने से हुई मौत के बाद निर्देश जारी करते हुए कहा कि कुत्तों को सार्वजनिक स्थान पर ले जाने से पहले उनके मुंह पर मुखौटा लगाने को अनिवार्य किया था। एक मकान मालिक को सिर्फ एक ही कुत्ता रखने की इजाजत है। इसके बावजूद जिले में नगर निकाय और पशुपालन विभाग से किसी ने भी कुत्ता पालने की अनुमति नहीं ली हुई है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजीव प्रसाद ने कहा कि जिला अस्पताल में बच्चे का प्राथमिक उपचार करने के बाद उसे दिल्ली सफदरगंज के लिए रेफर कर दिया गया है। बच्चे के दोनों पैरों पर जख्म काफी गहरे मिले।