पावर कारपोरेशन में हुए पीएफ (भविष्य निधि) घोटाले में बिजली अफसर फंस गए हैं। जिलाधिकारी ने बिजली अफसरों को तलब किया है। साथ ही संविदा यूनियन पदाधिकारियों को भी मौजूद रहने के निर्देश दिए गए है। डीएम के तलब करते ही बिजली अफसर बैकफुट पर आ गए हैं।
पावर कारपोरेशन में 50 करोड़ के पीएफ घोटाले में बिजली अफसरों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। कारपोरेशन के 200 और संविदा के 700 कर्मचारियों के पीएफ का कोई रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं है। संविदाकर्मियों का पीएफ तो खंड अधिकारी और ठेकेदार डकार गए हैं, लेकिन विभागीय कर्मियों के पीएफ का कोई हिसाब-किताब नहीं है। मामला संज्ञान में आने के बाद जिलाधिकारी ने 23 जून को बिजली अफसरों को तलब किया है।
डीएम ने एमडी से शिकायत करने वाले यूनियन पदाधिकारियों को भी बैठक में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं।
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ठेकेदारों में मची खलबली
संविदाकर्मियों के पीएफ घोटाले को अंजाम देने वाले ठेकेदारों में भी अफसरों को तलब करते ही खलबली मच गई है।
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कोट्स
जिलाधिकारी ने 23 जून को बैठक बुलाई है, जिसमें यूनियन पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। बैठक में सभी मुद्दों पर चर्चा कर समस्या का निस्तारण किया जाएगा।
एके चौधरी, अधीक्षण अभिंयता
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डीएम के संज्ञान में पूरा मामले डालने के बाद अफसरों को तलब किया गया है। डीएम स्वयं पूरे मामले पर बिजली अफसरों और यूनियन पदाधिकारियों साथ बैठक करेंगी।
- सुरेंद्र सिंह, सचिव, बिजली संविदा यूनियन