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डीएम कॉलोनी के लोगों ने किया चुनाव का बहिष्कार

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देवीपुरा मोहल्ले में लोगों से बातचीत करते एसडीएम। - फोटो : BULANDSHAHR
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डीएम कॉलोनी के लोगों ने किया चुनाव का बहिष्कार
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बुलंदशहर। सदर विधानसभा सीट पर मंगलवार को उपचुनाव के लिए मतदान संपन्न हो गया। लेकिन, डीएम कॉलोनी के लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया। कॉलोनीवासियों का गुस्सा तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम के द्वारा उनके घरों के सामने लगाई गई दीवार के विरोध में था। उनका कहना है कि दीवार लगने से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
करीब तीन वर्ष तत्कालीन डीएम डॉ. रोशन जैकब ने डीएम कॉलोनी परिसर के पिछले हिस्से में बनी कालोनियों के सामने दीवार खड़ी करवा दी थीं। जिससे कि कोई भी आम नागरिक बिना वजह सरकारी आवासीय कालोनी में न घुस सके। जिसका स्थानीय लोगों ने काफी विरोध किया था। साथ ही बाद में दीवार को लेकर काफी बवाल भी हुआ था। मामले में कुछ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज हुई थी। लेकिन, दीवार को हटाया नहीं गया था। हालांकि, कुछ समय पूर्व दीवारों से पैदल और बाइक निकलने के लिए कुछ रास्ते दे दिए गए थे। लेकिन, अब भी वहां एंबुलेंस आदि गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल है। मंगलवार को स्थानीय लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया और अपने घरों के बाहर मतदान बहिष्कार के पोस्टर चस्पा कर दिए। मामले की जानकारी होते ही अतिरिक्त एसडीएम संजय कुमार मौके पर पहुंचे और लोगों को मतदान करने की अपील की। जिसके बाद कुछ स्थानीय लोगों ने जाकर मतदान किया। हालांकि, कुछ लोग फिर भी नाराज रहे और मतदान नहीं करने गए।
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यह बोले लोग
दीवार लगने के बाद काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाजार जाने के लिए, बच्चों को स्कूल जाने के लिए काफी घूम कर जाना पड़ता है।
- राजवती, स्थानीय नागरिक
दीवार प्रकरण के दौरान पुलिस प्रशासन ने काफी दबंगई दिखाई थी। लोगों को खदेड़ कर जेल भेज दिया था। स्थानीय लोगों की एक बात नहीं सुनी गई। वोट डालने से क्या फायदा।
उमेश चंद्रा, स्थानीय नागरिक
मोहल्लेवासी इस बार चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं। क्योंकि, करीब तीन वर्ष पूर्व दीवार लगाने का विरोध किया था। लेकिन, दीवार लगा दी गई। प्रशासन ने लोगों की परेशानियों का ध्यान ही नहीं किया।
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वैभव वशिष्ठ, स्थानीय नागरिक
वोट डालना हमारा मौलिक अधिकार है। लेकिन, जिन अनावश्यक चीजों से हमें परेशानी होती है, उनका विरोध करना भी हमारा मौलिक अधिकार है। हमारी दादी की तबियत खराब हुई थी। उन्हें एंबुलेंस तक ले जाने के लिए गोद में ले जाना पड़ा।
- सुमित अग्रवाल, स्थानीय नागरिक
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