नोटबंदी के बाद ख्वाहिशों को दफन कर बाबुल बेटियों की विदाई के लिए मजबूर हैं। हालात यह है कि 447 परिवार बैंक एकाउंट से अपना पैसा निकालने के लिए अफसरों के सामने गिड़गिड़ाते रहे जिनमें से महज 30 परिवारों को बेटियों की शादी के लिए 25 हजार से ढाई लाख तक रुपया मिल पाया।
आठ नवंबर को नोटबंदी के बाद 970 परिवारों ने बेटा, बेटी और बहन के विवाह के लिए बैंक एकाउंट से अपनी पसीने की कमाई को निकलाने के लिए अफसरों के पास आवेदन किया था। आठ नवंबर से दो दिसंबर तक 790 में से 447 बेटियों की डोलियां उठ चुकी है। 447 में महज 30 परिवारों को बेटियों की शादी के लिए 25 हजार से ढाई लाख तक रुपया मिल पाया।
बाकी 417 शादियों में बाबुल को अपना पैसा नहीं मिल सका। ऐसे में बेटियों को कैसे विदा किया होगा, यह बेबस बाबुल ही बयां कर सकता है। प्राप्त आवेदन के हिसाब से 523 शादियां चार मार्च तक होनी हैं। एसडीएम स्तर पर सभी कार्रवाई पूरी कर आवेदन बैंकों को फारवर्ड कर दिया गया, मगर बैंकों में इन आवेदनों पर कोई विवार नहीं हो पा रहा है।
आलम यह कबैंक में करेंसी की कमी के कारण रसूखदार लोगों को भी बेटियों की शादी के लिए 2.50 लाख रुपया नहीं मिल पा रहा है। तहसील प्रशासन के मुताबिक शशिकांत जैन पीए जिला जज की बेटी की शादी 10 दिसंबर को है। उन्होंने 2.50 लाख रुपये निकालने के लिए एसडीएम सदर के पास आवेदन किया है।
तहसील स्तर पर सभी कार्रवाई पूरी कर ली गई। मगर बैंक में मामला अटक गया है। धमरावली के डोरीलाल की बेटी की शादी 9 दिसंबर को है। भूपसिंह निवासी चिरचिटा की बेटी का विवाह 10 दिसंबर को होनी है। सभी ने 2.50-2.50 लाख रुपये निकालने की गुहार अफसरों से लगाई है। डीएम ने उधारी से शादी की बात कहकर जमील को वापस लौटा दिया।
बैंकों में कैश की जबरदस्त क्राइसेस है। ऐसे हालात में एकमुश्त 2.50 लाख देना मुमकिन नहीं है। जहां कैश ठीक है वहा जरूरतमंद परिवारों को रुपये दिए भी गए हैं। - सपताल मेहता, एलडीएम
बैंकों में नई करेंसी की कमी चल रही है। फिर भी प्रयास किया जा रहा है शादी विवाह वाले परिवारों को कैश में प्राथमिकता दी जाए। । - आंजनेय कुमार सिंह, डीएम