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बिटिया की गलने लगीं हड्डियां तो मां-बाप ने किया किनारा

Thu, 15 Sep 2016 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
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हड्डी रोग से पीड़ित अंजू तोमर। - फोटो : ब्यूरो
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संतान के लिए मां-बाप का दिल इतना कठोर कैसे हो सकता है कि वह बुरे वक्त में बच्चे का साथ छोड़ दें। बुलंदशहर के जमालपुर में माता-पिता ने असाध्य हड्डी रोग से पीड़ित दिव्यांग बेटी का उपचार कराने के बजाय उसे घर से बाहर निकाल दिया।
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मामला प्रशासन के संज्ञान में आया तो डीएम ने भी पांच हजार रुपये का चेक देकर इतिश्री कर ली। बेटी उपचार के लिए सरकारी दफ्तरों पर मदद की गुहार लगा रही है। बिटिया ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी चिट्ठी भेजकर इलाज कराने की गुहार लगाई है।

शिकारपुर तहसील के गांव जमालपुर निवासी मंजू तोमर पुत्री उदयराज सिंह 26 साल से हड्डी के असाध्य रोग से पीड़ित है। मंजू बचपन से अपनी बुआ के पास धुमैड़ा गांव में रही। वर्ष-2013 में बुआ के देहांत के बाद मंजू अपने माता-पिता के पास जमालपुर आ गई। मां बाप ने परवरिश और उपचार कराने के बजाय मंजू को घर से बाहर निकाल दिया।
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मंजू फिलहाल अपने रिश्तेदार के यहां मुफलिसी में जिंदगी गुजार रही है। एक सप्ताह पूर्व समस्याओं की सूची लेकर मंजू डीएम से मिली।  डीएम ने मंजू को रेड क्रास सोसायटी ने पांच हजार रुपये का चेक दिलाकर इतिश्री कर ली। बृहस्पतिवार को भी मंजू का रिश्तेदार उसको लेकर एडीएम प्रशासन के पास पहुंचा।

एडीएम ने मदद को भरोसा दिला मंजू को वापस कर दिया। मंजू ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुचयमंत्री अखिलेश यादव को भी पत्र भेज उपचार की गुहार लगाई है। डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक तालियान ने मेडिकल रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद बताया कि मंजू की हडिडयों में डिकंपोजिशन (गलन) शुरू हो गई है।

हड्डियां गलने से मंजू का कूल्हा बेकार हो चुका है। टांगों ने काम करना बंद कर दिया है। मंजू के शरीर में खून की भी कमी है। इसलिए मंजू का वजन महज 27 किग्रा. रह गया है।

मामला संज्ञान में है। मंजू को पांच हजार रुपये रेड क्रास सोसायटी से दिलवा दिए गए हैं। मंजू की और मदद जल्द ही जाएगी। - अरविंद कुमार मिश्र, एडीएम प्रशासन
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