पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक से दोनों मुल्कों में खटास के चलते इस बार दस पाकिस्तानी लोग औरंगाबाद नहीं आ पाए। ये लोग हर बार यहां के ऐतिहासिक मोहर्रम में शरीक होते थे। सरकार ने इनको वीजा देने से स्पष्ट मना इंकार कर दिया।
वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान के बीच झगड़े के समय कुछ लोग पाक में ही रह गए थे। इनमें औरंगाबाद के शिया समुदाय के काफी लोग शामिल थे। पाकिस्तान जाने के बावजूद ये अपने पूर्वजों की जन्मस्थली के मोहर्रम को नहीं भूले।
यही कारण रहा कि देश विभाजन के 69 वर्ष बाद भी पाकिस्तानी लोग हर बार मोहर्रम में शरीक होने के लिए औरंगाबाद आते रहे हैं। इस बार उनके न आने की वजह सर्जिकल स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के रिश्तों में घुला जहर है। पाक परिवारों के मुताबिक, उन्होंने वीजा के लिए तीन माह पहले आवेदन किया था।
मगर अब ऐन वक्त पर सुरक्षा संबंधी कारण सरकार ने वीजा देने से स्पष्ट मना कर दिया गया है। सिप्ते अब्बास, नासिर अब्बास आदि हर साल औरंगाबाद के मोहर्रम में शरीक होने के लिए आते थे।