कचहरी स्थित पार्क में बैठे बंदर। संवाद
बुलंदशहर। शहर के साथ जिलेभर में लोग बंदरों से परेशान हैं। स्थिति यह है कि नगर निकायों की ओर से बंदर पकड़ने के लिए किए जा रहे प्रयास विफल हो रहे हैं। शहरी क्षेत्र में बंदर पकड़ने के लिए आए एक ठेकेदार के कर्मचारी आठ दिन में मात्र एक बंदर पकड़ सके। इसके चलते ठेकेदार ने काम करने से मना कर दिया। जबकि गांवों में लोग निजी स्तर पर धनराशि एकत्रित करते हुए बंदर पकड़वाने की तैयारी कर रहे हैं।
शहरी क्षेत्र के साथ अब गांवों में भी लोग बंदरों से लोग परेशान हैं। शहरी क्षेत्र में बंदर पकड़ने के लिए नगर पालिका ने टेंडर जारी किया था। जिसके चलते ठेकेदार ने एक हजार से अधिक बंदर पकड़े थे। इसके बाद बंदरों की संख्या और बढ़ी तो लोगों को और परेशानी होने लगी।
जिसके चलते नगर पालिका ने दो हजार बंदर पकड़ने के लिए टेंडर निकाला था। एक ठेकेदार ने 295 रुपये प्रति बंदर पकड़ने के लिए सहमति दी थी।
बताया जा रहा है कि ठेकेदार ने बंदर पकड़ने के लिए शहर में जाल लगाया, लेकिन आठ दिन में केवल एक बंदर ही जाल में फंसा। बताया जा रहा है कि ठेकेदार को नगर पालिका की ओर से कार्यादेश ही नहीं मिला था। जिसके चलते अब अधिकारी भी ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
गांवों में लोग इकट्ठा कर रहे धनराशि : जिले के विभिन्न गांवों में बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। गांव-गांव बंदर पकड़ने के लिए लोग निजी स्तर से धनराशि एकत्रित कर रहे हैं। शिकारपुर क्षेत्र के गांव भैंसरोली निवासी गंगा प्रसाद शर्मा ने बताया कि गांव में करीब 30 बंदर पिछले एक माह से लोगों को परेशान कर रहे हैं।
जिसके चलते लोग अपने स्तर से धनराशि एकत्रित कर रहे हैं। गांव निवासी नरेंद्र सिंह, ब्रह्म सिंह और केशव सिंह ने बताया कि बंदर पकड़ने वाली टीम ने प्रति बंदर 1500 रुपये की मांग की है। ऐसे में 30 बंदर पकड़ने के लिए करीब 45 हजार रुपये एकत्रित किए जा रहे हैं। बताया कि गांव में आठ लोगों पर बंदर हमला कर चुके हैं।
इसके अलावा सलेमपुर निवासी सतीश कुमार ने बताया कि कस्बे में बंदरों के आतंक के कारण लोगों ने स्वयं धनराशि एकत्रित करके बंदरों को पकड़वाया था।