जहरीली शराब कांड में सातवीं मौत, तीन के आंखों की गई रोशनी
बुलंदशहर/सिकंदराबाद। जीतगढ़ी में जहरीली शराब के सेवन से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर सात पहुंच गया है। उपचार के बाद घर पहुंचे एक और व्यक्ति की बुधवार को मौत हो गई। मौत की सूचना पर एसडीएम, सीओ पुलिसबल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया है। वहीं, दूसरी जहरीली शराब ने गांव के ही तीन लोगों की आंख की रोशनी छीन ली।
गत आठ जनवरी को जहरीली शराब के सेवन से कोतवाली क्षेत्र के गांव जीतगढ़ी में सरजीत, कलुआ, सतीश, सुखपाल, पन्नालाल और भगवत की मौत हो गई थी। जबकि 19 लोगाें की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें उपचार के लिए जनपद के अलावा, नोएडा, मेरठ के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। जिनका उपचार चल रहा था। वहीं, कुछ लोग उपचार के बाद घर लौट आए थे। गांव जीतगढ़ी निवासी दीक्षित कुमार ने बताया कि उसके पिता प्रेम सिंह (59) की भी आठ जनवरी को जहरीली शराब पीने से हालत बिगड़ गई थी। उनका नोएडा स्थित कांशीराम अस्पताल में उपचार चल रहा था। उन्होंने बताया कि चार दिन पूर्व ही उनके पिता को अस्पताल से छुट्टी मिली थी और वह घर आ गए थे। घर पर आने के बाद उनके शरीर पर सूजन आने लगी। जिसके बाद उन्होंने उन्हें जिला अस्पताल बुलंदशहर में दिखाया। बुधवार सुबह उनकी मृत्यु हो गई। सूचना पर एसडीएम रविशंकर सिंह, सीओ नम्रता श्रीवास्तव पुलिस, राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
मृतक प्रेम सिंह के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है। आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। - नम्रता श्रीवास्तव, क्षेत्राधिकारी सिकंदराबाद
परिवार को सहारा देने वाले अब परिवार पर ही हो गए हैं आश्रित
सिकंदराबाद। गांव निवासी गजे सिंह (54) ने बताया कि जहरीली शराब के सेवन से उसकी तबीयत खराब होने के बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान धीरे-धीरे उसकी आंख की रोशनी चली गई। अब अस्पताल से उसे छुट्टी दे दी गई है। इलाज के लिए कोई सरकारी मदद भी नहीं मिल रही है। वह अपने खर्च पर उपचार करा रहा है। वह चिनाई का कार्य कर परिवार के लोगाें का पालन पोषण करता था। अब वह परिवार के लोगों पर बोझ बन गया है। वहीं, दूसरी ओर गांव निवासी लक्ष्मण (45) ने बताया कि हालत बिगड़ने पर उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान धीरे-धीरे उसकी आंखों की रोशनी जाने लगी। उसकी आंखों की करीब 60 प्रतिशत रोशनी चली गई। अब उसे ठीक से दिखाई भी नहीं देता। अस्पताल से छुट्टी के बाद अब वह अपने खर्च पर ही उपचार करा रहा है। वह सिलाई का कार्य कर परिवार का पालन पोषण करता था। लेकिन आंखों की रोशनी चले जाने के कारण वह काम नहीं कर पा रहा है। इसके अलावा संजय (51) ने बताया कि जहरीली शराब के सेवन से उसकी भी हालत खराब होने पर उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान धीरे-धीरे उसकी आंखों की रोशनी जाती रही। उसकी आंखों की 70 प्रतिशत रोशनी चली गई है। साफ दिखाई नहीं देने के कारण वह काम नहीं कर पा रहा है। मजदूरी कर परिवार को सहारा लगाने के बजाए अब वह परिवार पर आश्रित हो गया है। पीड़ितों का कहना है कि अभी तक उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है।
मुआवजा नहीं मिलने से परिजनों में मायूसी
सिकंदराबाद। जीतगढ़ी शराब कांड के पीड़ितों को अभी तक मुआवजा नहीं मिलने से उनके परिजनों में मायूसी है। मृतक सतीश, कलुआ, सरजीत, सुखपाल, पन्नालाल, भगवत व अन्य पीड़ितों के परिजनों ने बताया कि घटना के 20 दिन बाद भी उन्हें कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है। प्रशासनिक अफसर कई बार उनके घर पर आए और आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिया। मगर आज तक भी उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिली।
मुख्य आरोपियों को नहीं पकड़ सकी पुलिस
सिकंदराबाद। जीतगढ़ी में जहरीली शराब की खेप पहुंचाने के मुख्य आरोपी मिंकू, टिंकू को पुलिस घटना के 20 दिन बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी। जबकि, दोनों भाइयों के खिलाफ सिकंदराबाद के अलावा थाना कासना में भी मिलावटी शराब की फैक्टरी संचालित करने की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। दोनों पर 25-25 हजार हजार का इनाम भी घोषित है।