मुकाबला हारे, हौसला नहीं... लाल ने जीता सबका दिल
बुलंदशहर। टोक्यो ओलंपिक में भले ही अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर सतीश यादव पदक से चूक गए हों, लेकिन परिवार और लोगों के दिल में उन्होंने अपनी विशेष छवि बना ली है। उनके क्वार्टर फाइनल मुकाबले को देखने के लिए सुबह लोगों की निगाहें टीवी पर टिकी रहीं। परिजनों ने कहना है हि सतीश मुकाबला भले हर गए हों लेकिन हौसला अभी भी बुलंद है। उन्होंने सभी का दिल जीत लिया है। चोट लगने के बाद भी उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया।
टीवी पर सुबह से ही टिकी रहीं निगाहें
टोक्यो ओलंपिक में बुलंदशहर के सुपर हैवीवेट मुक्केबाज सतीश यादव क्वार्टर फाइनल खेलने उतरे। क्वार्टर फाइनल मुकाबला देखने के लिए सुबह से ही परिजन समेत खेल प्रेमी उत्साहित नजर आए और सभी को उम्मीद थी कि सतीश क्वार्टर फाइनल मुकाबला जीतकर इतिहास रचेंगे। मुकाबला जैसे-जैसे बढ़ता गया वैसे ही लोगों के दिल की धड़कन बढ़ती चली गई। अंतिम राउंड में सतीश यादव को हार का सामना करना पड़ा।
2010 में गोल्ड मेडल से शुरू हुआ सफर
सतीश यादव ने पहला गोल्ड मेडल 2010 में उत्तर भारत एशिया चैंपियनशिप में जीता। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सतीश ने पहला नेशनल चैंपियनशिप सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने एशियन गेम्स 2014 में कांस्य पदक जीता, 2015 में बैंकाक में हुई एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2018 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता और 2019 में बैंकाक में हुई एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं। हाल ही में चोट लगने के कारण जर्मनी में हुए कोलोगन बॉक्सिंग वर्ल्डकप में गोल्ड मेडल जीतने से चूक गए और मैच न होने के कारण सिल्वर मेडल प्राप्त किया। देश-विदेश में बॉक्सिंग प्रतियोगिता में पदक जीतकर देश का मान बढ़ाने और विदेशी धरती पर तिरंगा फहराने पर बॉक्सर सतीश यादव को भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं, पहली बार ओलंपिक में प्रतिभाग करने का मौका मिला।
बेहतरीन प्रदर्शन, बधाई के पात्र
क्वार्टर फाइनल में जिले के अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर सतीश यादव से काफी उम्मीदें थीं। लेकिन खेल में हार-जीत का सामना प्रत्येक खिलाड़ी को करना पड़ता है। सतीश यादव काफी अच्छा खेले और यहां तक पहुंचे, इसके लिए वह बधाई के पात्र है। - अभिषेक पांडेय, सीडीओ
अच्छा खेले
मौजूदा विश्व चैंपियन के सामने सतीश यादव बहुत अच्छा खेले। काफी कड़ा मुकाबला रहा। सतीश यादव ने जीत के लिए काफी प्रयास किया। इस मुकाबले से उन्हें भविष्य में काफी मदद मिलेगी। यहां तक के सफर के लिए वह बधाई के पात्र हैं। - नवीन कुमार त्यागी, जिला क्रीड़ाधिकारी
बढ़ाया जिले का मान
ओलंपिक की रिंग के पहले मुकाबले में जिस तरह से सतीश यादव लड़े, उसे देखकर मेडल की उम्मीद जाग उठी थी। दूसरा मुकाबला काफी संघर्ष भरा रहा। इस हार के बावजूद उन्होंने जिले का नाम विश्व में दर्ज कराया। मंच से बुलंदशहर का नाम सुनना काफी अच्छा रहा।- शाह फैसल, उपाध्यक्ष उप्र मुक्केबाजी संघ
चोट के बाद खेलना बड़ी बात
छोटे से गांव से बॉक्सिंग शुरू कर आज सतीश अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। जिसे खिलाड़ी सपना समझता है। ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना और क्वार्टर फाइनल तक पहुंचना बहुत बड़ी बात है। जीत और हार खेल का हिस्सा है। चोट के बावजूद उनका खेलना काबिल-ए तारिफ है। आने वाले पेरिस ओलंपिक में देश का नाम रोशन करने को अग्रिम शुभकामनाएं। - शांति स्वरूप, अंतरराष्ट्रीय कैनोइंग खिलाड़ी