अब ग्राम प्रधान पेयजल की शुद्धता की जांच करते दिखाई देंगे। शासन की ओर से 951 ग्राम पंचायतों को 1200 वाटर टेस्टिंग किट उपलब्ध कराई गई हैं। ग्राम प्रधानों को इसके लिए ट्रेनिंग भी शुरू होगी।
जनपद में 951 ग्राम पंचायतें हैं। स्वच्छता के पैमाने पर कुछ गांवों में पेयजल साफ नहीं है। काली नदी के आसपास के गांवों में तो पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है। पेयजल की गुणवत्ता का पता लगाने के लिए प्रत्येक ग्राम प्रधान को पेयजल टेस्टिंग की डिजिटल किट मिलेगी।
शासन ने 1200 टेस्टिंग किट ग्राम्य विकास विभाग को उपलब्ध कराई हैं। जल्द ही वाटर टेस्टिंग किट का वितरण ब्लाकों से शुरू होगा। प्रधानों को किट से पानी की जांच का तरीका सिखाया जाएगा। सीडीओ ने बताया ट्रेनिंग शेडयूल जल्द ही जारी कर दिया जाएगा।
वाटर टेस्टिंग के लिए मिली डिजिटल किट के स्केल पर लाल, पीला और हरे रंग का निशान होगा। पानी की जांच के बाद इंडिकेटर की सूई जिस रंग पर रुकेगी, पानी की गुणवत्ता उसी पर निर्भर करेगी।
लाल रंग का मतलब पानी बेहद दूषित, पीले कलर का मतलब पानी दूषित और हरे रंग का मतलब पानी पीने योग्य स्वच्छ है। डिजिटल किट से पानी के नमूने की पांच मिनट में जांच संभव होगी।
शासन की ओर से भेजी गई वाटर टेस्टिंग किट प्राप्त हो चुकी हैं। जल्द ही किटों का वितरण प्रधानों में किया जाएगा। ब्लाक स्तर पर ग्राम प्रधानों को पानी की जांच का तरीका भी सिखाया जाएगा। जसजीत कौर
सीडीओ, बुलंदशहर