गर्मी और प्यास ने बेजुबान जानवर और परिंदों को दर-दर भटकने के लिए मजबूर कर दिया है। बुधवार को पानी की तलाश में एक बारहसिंगा अनूपशहर के गांव खालौर पहुंच गया। वहां पानी के लिए एक घेर में घुसने के दौरान वह चोटिल हो गया। ग्रामीणों ने प्यासे बारहसिंगा को पानी और चारा दिया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया।
गेहूं की फसल कटने से खेत खाली हो गए हैं। इससे प्यासे हिरन और बारहसिंगा समेत भोले-भाले जानवरों को छिपने के लिए जगह नहीं मिल रही है। गर्मी के कारण गड्ढों, तालाब, सिंचाई बरहों और नालों का पानी भी सूख गया है। ऐसे में जंगल में पानी का इंतजाम नहीं होने से वन्य जीव आबादी की ओर आने को मजबूर हैं।
यहां इनको शिकारियों और कुत्तों से काफी खतरा होता है। बुधवार को पानी की तलाश में प्यासा बारहसिंगा आबादी के बीच खालौर गांव पहुंच गया। यहां ग्रामीण राजकुमार के घेर में पानी देखकर वह अंदर घुसने का प्रयास करने लगा।
उसके मुंह पर काफी चोट लग गई। ग्रामीण बिल्लू ने वन विभाग को बारहसिंगा के गांव में पहुंचने की जानकारी दी। वन दरोगा फतेह सिंह, वन रक्षक देवेंद्र सिंह और हितेश कुमार मौके पर पहुंचे। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों की मदद से घायल बारहसिंगा का इलाज कराया।
पंद्रह दिन में हुई दो हिरनों की मौत
अनूपशहर स्थित टोरी और पोटाबादशाहपुर गांवों में पंद्रह दिन के अंदर दो हिरनों की मौत हो गई। यह दोनों हिरन पानी की तलाश में आबादी की तरफ आ गए थे। गांव में कुत्तों ने उन्हें नोच डाला।
बुगरासी में मिला था मृत बारहसिंगा
पिछले दिनों शिकारियों ने बुगरासी में बारहसिंगा का शिकार किया था। पानी की तलाश में जंगल से बाहर आए बारहसिंगा को शिकारियों ने निशाना बना लिया था।
नहीं है कोई सुरक्षा व्यवस्था
वन विभाग के पास वनों को सुरक्षित रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जानवरों के इलाज के लिए भी विभाग के पास न तो कोई फंड है और न ही स्टाफ। डीएफओ एके सक्सेना ने बताया कि जानवरों की सुरक्षा और देखभाल के लिए शासन से कोई मदद नहीं मिलती।
जिले में दो छोटे वाटर हॉल
जानवरों की प्यास बुझाने के लिए वन विभाग ने दो बाई दो फीट लंबाई-चौड़ाई के दो वाटर हॉल खुदवाए हैं। इन्हीं दो हॉल के भरोसे बेजुबानों की खास प्रजातियां हैं।
जानवरों के चारे और पानी के लिए अलग से कोई फंड नहीं मिलता है। उपलब्ध साधनों में ही उनके लिए पानी की व्यवस्था करवाई जाती है। - एके सक्सेना, डीएफओ