प्रमुख सचिव समाज कल्याण सुनील कुमार ने बृहस्पतिवार को समाज कल्याण, स्वास्थ्य और बेसिक शिक्षा विभाग की योजनाओं की गहनता से समीक्षा की। अधूरे टारगेट और लंबित मामलों को लेकर प्रमुख सचिव ने समाज कल्याण अधिकारी, सीएमओ और बीएसए को खरी खरी सुनाई।
प्रमुख सचिव स्थानीय अफसरों के ढुलमुल रवैए से खिन्न नजर आए। प्रमुख सचिव ने सीएमओ को गर्भवती महिलाओं के रिकार्ड पर घेर लिया। तब सीएमओ गर्भवती महिलाओं की संख्या नहीं बता पाए।
प्रमुख सचिव सुनील कुमार ने कहा कि अफसरों की लापरवाही के कारण शासन की योजनाओं को लाभ आम आदमी तक नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने खासतौर पर समाज कल्याण अधिकारी से कहा कि आम आदमी मामूली दिक्कत को लेकर दफ्तरों के चक्कर काटते हैं।
दफ्तर में बैठे अफसर और कर्मचारी समस्याओं का समाधान करने के बजाय जानबूझकर असहाय लोगों को परेशान करते हैं। समाज कल्याण अधिकारी सुमन गुप्ता ने मीटिंग में बताया कि राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत माह में 1095 आवेदन मिले। 164 आवेदन पत्रों को स्वीकार और 66 आवेदन पत्रों को निरस्त किया गया।
इसी पर प्रमुख सचिव भड़क गए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा हर एक जरूरतमंद को योजना का लाभ पहुुंचाने की है। प्रमुख सचिव ने सीएमओ दीपक ओहरी को गर्भवती महिलाओं के रिकार्ड पर घेर लिया। सीएमओ से पूछा कि जनपद में गर्भवती महिलाएं कितनी हैं। सीएमओ चुप रहे।
जानकारी नहीं मिलने पर प्रमुख सचिव ने सीएमओ को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में कायदे से सरकारी योजनाओं को क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। प्राथमिक विद्यालयों और शिक्षकों के रिकार्ड अपडेट नहीं होने पर प्रमुख सचिव ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को खूब हड़काया।
डीएम ने प्रमुख सचिव को योजनाओं के सही क्रियान्वयन को लेकर आश्वस्त किया। इस दौरान डीएम, एसएसपी, सीडीओ, सीएमओ आदि रहे।