जिला अस्पताल में लोकतंत्र सेनानियों के लिए दवाइयां नहीं हैं। शासन जरूरत पड़ने पर बाजार से लॉकल परचेज कर लोकतंत्र सेनानियों को दवाइयां उपलब्ध कराता है। इसके बावजूद लोकतंत्र सेनानियों को जरूरी दवाइयों के लिए भटकना पड़ रहा है।
जनपद में पांच सौ से अधिक लोकतंत्र रक्षा सेनानी हैं। लोकतंत्र सेनानी 1975 के मीसा आंदोलन में इमरजेंसी के दौरान जेल भेजे गए थे। इनके योगदान को देखते हुए सरकार की ओर से लोकतंत्र रक्षा सेनानियों को मुफ्त यातायात और स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराई जाती हैं।
यदि सरकारी अस्पतालों में संबंधित मर्ज की दवाइयों का स्टाक नहीं होता है तो अस्पताल प्रबंधन बाजार से दवाइयां खरीदकर लोकतंत्र सेनानी को उपलब्ध कराता है। घर खर्च के लिए भी लोकतंत्र सेनानियों को 15 हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से दिए जाते हैं।
अब जिला अस्पताल में आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। बनैल गांव के भारत भूषण समेत करीब एक दर्जन लोकतंत्र सेनानियों को दवाइयों का इंतजार है। दवाइयां उपलब्ध नहीं कराने के पीछे सीएमएस डा. राजकुमार ने फंड की कमी बताया है।
खासबात यह है कि सीएमएस दो बार फंड के लिए शासन को रिमाइंडर भेज चुके हैं, इसके बावजूद तीन मई से दवाइयों की लॉकल परचेज बंद है।