नेपियर घास करेगी गोवंश के लिए हरे चारे की पूर्ति
बुलंदशहर। जनपद में संचालित निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों में जल्द ही हरे चारे की किल्लत दूर हो जाएगी। आश्रय स्थलों पर नेपियर प्रजाति की घास उगाई जाएगी। अफसरों के अनुसार नेपियर प्रजाति की घास वर्ष भर उपलब्ध रहती है। झांसी स्थित चारा एवं चारागाह संस्थान से यह घास मंगवाई जाएगी। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।
प्रदेश में योगी सरकार ने आवारा गोवंश के संरक्षण के लिए निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल बनवाए। जनपद की 158 न्याय पंचायतों और नगर निकायों में 154 निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल खोले गए। यहां पर अभी तक दस हजार से अधिक आवारा गोवंश को संरक्षित किया गया है। आश्रय स्थलों के संचालन और गोवंश के भरण-पोषण के लिए शासन की ओर से समय-समय पर राशि जारी की जाती है। पिछले दिनों शासन के आदेश पर आश्रय स्थलों पर भूसा बैंक बनाए गए थे। इसके तहत किसानों से भूसा खरीद कर आश्रय स्थल पर एकत्रित किया गया। अफसरों का दावा है कि इस समय आश्रय स्थलों पर गोवंश के लिए भूसे की कमी नहीं है, लेकिन गोवंश के बेहतर स्वास्थ्य के लिए हरे चारे की भी जरूरत होती है। हरे चारे का विकल्प तलाशने में सीडीओ अभिषेक पांडेय ने विभागीय अधिकारियों के साथ पिछले दिनों बैठक की थी। तय किया गया था कि आश्रय स्थलों पर नेपियर घास उगाई जाए। इसके उगाने से गोवंश के लिए हरे चारे की कमी नहीं रहेगी।
पूरे वर्ष हरी रहती है नेपियर घास
गोवंश हो या फिर अन्य पशु, सभी के लिए हरा चारा जरूरी होता है। हालांकि हरे चारे में ज्वार, बाजरा, मक्का और जंगली घास एक अच्छा विकल्प है, लेकिन यह सब एक निर्धारित समय तक ही हरे रहते हैं। जबकि नेपियर घास ऐसी है, जो पूरे वर्ष हरी रहती है। इसका हरा चारा भी ज्वार, बाजरा, मक्का आदि की अपेक्षा पशुओं के स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।
गोवंश को हरा चारा उपलब्ध करवाने के लिए निराश्रित गोवंश स्थलों पर नेपियर घास उगाई जाएगी। इस घास को उगाने के लिए सभी आश्रय स्थलों पर जगह चिन्हित की जा रही है। जल्द ही झांसी से इस घास को मंगवाकर रोप दिया जाएगा। - डॉ. लक्ष्मी नारायण, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, बुलंदशहर