पावर कारपोरेशन के अफसरों का अजीबोगरीब कारनामा सामने आया है। एक उपभोक्ता अपना बिल चुकाने के लिए विभागीय दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अफसर उसे बिल देने को तैयार नहीं है। सभी अफसर उपभोक्ता को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर टरका रहे हैं। अब उपभोक्ता ने पीवीवीएनएल के एमडी से शिकायत की है।
नगर के कालाआम स्थित सोबित कलर लैब पर 18 किलोवाट का बिजली कनेक्शन है। इसका औसतन बिल करीब 20 हजार रुपये महीना आता है। उपभोक्ता गौरव गुप्ता ने बताया कि करीब तीन साल से उनका बिल नहीं बनता। हर बार उन्हें अपने बिल के लिए दफ्तर जाना पड़ता है और बिल बनवाना पड़ता है। पिछले छह माह से उनका बिल ही नहीं बना है।
अपना बिल बनवाने के लिए उन्होंने जेई से लेकर एसडीओ और एक्सईएन तक शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा मीटर विभाग के एक्सईएन से भी बिल बनवाने की शिकायत की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हर कोई अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। उन्होंने थक-हारकर पूरे मामले की शिकायत एमडी से की तो वह भी दंग रह गए।
इतने बड़े उपभोक्ता को बिल नहीं पहुंचाए जा रहे हैं, जबकि शासन की तरफ से राजस्व वसूली का इतना अधिक प्रेशर है। एमडी ने तत्काल पूरे मामले की रिपोर्ट अधीक्षण अभियंता से तलब की है। गौरतलब है कि शासन की तरफ से अधिक से अधिक राजस्व वसूली के निर्देश हैं। समय-समय पर खुद ऊर्जा सचिव इसकी समीक्षा कर रहे हैं।
इस मामले ने सभी को हैरत में डाल दिया कि आखिर जब उपभोक्ता अपना बिल चुकाने को तैयार है तो उसे बिल क्यों नहीं दिया जा रहा है, जबकि उपभोक्ता पर छह माह का बिल करीब सवा लाख रुपये के आसपास बैठेगा।