जिद, जुनून और शिखर। यही है जनपद के युवा पर्वतारोही भूपेश का सपना। सपना पूरा करने के लिए इस पर्वतारोही ने मौत को भी मात दे दी।
कारगिल की बर्फीली जमीन में 25 फीट नीचे धंसने के 15 मिनट बाद भूपेश को रेस्क्यू कर निकाला गया।गंभीर हालत में बाहर निकले भूपेश ने हौसला नहीं हारा और फिर मंजिल की तरफ बढ़ गया।
नगर के देवीपुरा निवासी युवा पर्वतारोही भूपेश (32) जम्मू-कश्मीर की सबसे ऊंची चोटी नुन (7136 मीटर) को फतह करने के मिशन पर निकला था। इंडियन आर्मी, जम्मू कश्मीर पुलिस जवानों समेत 30 पर्वतारोहियों की टीम 28 दिन के मिशन नुन पर निकली थी।
‘अमर उजाला’ से बृहस्पतिवार सुबह फोन पर करीब पांच मिनट हुई बातचीत में भूपेश ने बताया कि करीब पांच दिन पहले पर्वतारोहियों की टीम के साथ वह कारगिल की चोटी पर पहुंच गए थे। कारगिल में पर्वतारोहियों की टीम को बर्फीली हवा और तूफान का सामना करना पड़ा।
टीम ने वहीं बेस कैंप बनाकर रुकने का फैसला किया। चार बार एवरेस्ट फतह कर चुके दार्जिलिंग के मशहूर पर्वतारोही ओनंजडा शेरपा, दार्जिलिंग के ही आदित्य, चंडीगढ़ के संजू और उत्तराखंड के चनुहार के साथ भूपेश ऊपर चढ़ रहे थे।
इस दौरान जब यह दल बेस कैंप से कैंप-1 की तरफ रवाना हुआ तो अचानक भूपेश पैरों के नीचे से हिडन क्रैवास (बर्फ के ग्लेशियर के बीच एक गहरी दरार) की बर्फ हट जाने से 25 फीट नीचे चला गया। दल में सबसे पीछे चल रहे भूपेश की चीख निकली तो दल के अन्य पर्वतारोहियों ने उस ओर देखा।
दल में मौजूद एक आर्मी के जवान की मदद से तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन कर करीब 15 मिनट बाद भूपेश को बाहर निकाला गया। 15 मिनट तक क्रैवास के 25 फीट नीचे रहने से भूपेश के दोनों हाथों का सेंशेसन खत्म हो गया था।
एक पल के लिए ऐसा लगा कि जैसे भूपेश के दोनों हाथ ठंड के कारण खत्म हो गए, लेकिन रेस्क्यू टीम की सूझबूझ से भूपेश का उपचार कर उसे सामान्य कर दिया गया। मौत को मात देने के बाद भी भूपेश का हौसला कम नहीं हुआ और वह नुन चोटी फतह करने के लिए निकल पड़े।
एवरेस्ट फतह करना है सपना
भूपेश पुत्र मोमराज सिंह साधारण परिवार से है। भूपेश का सपना है कि वह एवरेस्ट को फतह कर शिखर पर पहुंचे। भूपेश हिमाचल प्रदेश, नॉर्थ ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड की करीब 20 से ज्यादा ऊंची चोटियों को फतह कर चुका है।