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Hapur News: फर्जी मार्कशीट प्रकरण के अधिकारियों के समक्ष पेश हुए मोनाड के पदाधिकारी

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मोनाड विश्वविद्यालय। संवाद
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हापुड़। फर्जी डिग्री व मार्कशीट बांटने के आरोपों में घिरी मोनाड यूनिवर्सिटी की दोबारा जांच शुरू हो गई है। डीएम की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने सोमवार को मोनाड यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को तलब किया। करीब एक घंटे तक यूनिवर्सिटी के वीसी मोहम्मद जावेद और डिप्टी रजिस्ट्रार कर्नल डीपी सिंह से सीडीओ ने सवाल जवाब किए। सीडीओ ने यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से उनके पक्ष के दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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पिलखुवा स्थित मोनाड विश्वविद्यालय पर साल-2019 में सबसे पहले छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालयों पर फर्जी डिग्री बेचने और मार्कशीट बनाने का आरोप लगाए थे। इसके बाद एसआईटी की टीम ने प्रबंधक समेत तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, इसमें तीनों लोगों को जेल भेजा गया था। पिछले साल बड़ी मात्रा में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बेचने के आरोप में एसटीएफ ने विश्वविद्यालय में छापा मारा था।
टीम ने यहां से 12 आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए बड़ी मात्रा मार्कशीट और कंप्यूटर डाटा आदि जब्त किया था। मामले में शासन ने 25 अक्तूबर-2025 को डीएम की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया था। टीम ने इस प्रकरण की जांच कर मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी थी। फिलहाल पूर्व में गिरफ्तार किए गए सभी 12 आरोपी जमानत पर जेल से बाहर हैं।
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अब शासन की ओर से इस मामले में दोबारा जांच कराने के आदेश जारी किए गए हैं। इसमें डीएम की अध्यक्षता में नई जांच टीम का गठन किया गया है। समिति को इस मामले में सोमवार को विश्वविद्यालय पहुंचकर जांच करनी थी। लेकिन अधिकारियों ने मोनाड विश्वविद्यालय के अधिकारियों को दस्तावेज के लिए विकास भवन बुलाया।
इस दौरान सीडीओ श्रुति शर्मा ने यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को तलब किया। इस दौरान उन्होंने यूनिवर्सिटी के वीसी मोहम्मद जावेद, डिप्टी रजिस्ट्रार कर्नल डीपी सिंह समेत पांच लोगों से सवाल जवाब किए। उन्होंने अगले चरण में टीम को जरूरी दस्तावेज के साथ पहुंचने के निर्देश दिए हैं। हालांकि अभी इसकी तिथि निर्धारित नहीं की गई है।

फर्जी वेरिफिकेशन का आरोप
शिकायतकर्ता हरियाणा के पलवल निवासी नरेंद्र कुमार सोमवार को जांच समिति के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला पलवल के करीब 22 लोगों ने मोनाड यूनिवर्सिटी से फर्जी दस्तावेज हासिल किए और उन्हीं दस्तावेज के आधार पर अब वे नौकरी कर रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी में शिकायत की थी लेकिन यूनिवर्सिटी ने फर्जी वेरिफिकेशन कर दिया।
कोट
शासन के आदेश पर मोनाड यूनिवर्सिटी की जांच दोबारा शुरू की गई है। सोमवार को विश्वविद्यालय के अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया गया था। इस दौरान उनसे सवाल जवाब कर जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। - श्रुति शर्मा, सीडीओ
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