गंगा नदी में उछल कूद करती डॉल्फिन। स्रोत: विभाग
बुलंदशहर। गंगा में उछलकूद कर रहीं डॉल्फिन की सुरक्षा और उनका संरक्षण करने के लिए आधुनिक सेंसर लगाए जाएंगे। नरौरा बैराज पर सेंसर लगाए जाएंगे। बिजनौर में वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड व वन विभाग का सेंसर लगाने का प्रशिक्षण भी पूरा हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार सेंसर लगने के बाद डॉल्फिन गंगा की मुख्य धारा से दूर रहेंगी और बैराज से निकलने वाली नहरों में प्रवेश नहीं कर सकेंगी।
डीएफओ डाॅ. हरेंद्र सिंह ने बताया कि गंगा की डॉल्फिन विश्व में पाई जाने वाली डॉल्फिन की दुर्लभ प्रजातियों में से एक है। वर्ष 2009 में केंद्र सरकार ने डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। मेरी गंगा मेरी सूंस अभियान के तहत गंगा में बिजनौर से नरौरा तक करीब 225 किलोमीटर क्षेत्र में डॉल्फिन की गिनती की जाती है। गंगा के इस क्षेत्र को रामसर साइट के नाम से भी जाना जाता है। रामसर साइड में 18 से अधिक डॉल्फिन हैं। इन्हें पानी में पांच मीटर तक गहराई में रहना पसंद है। उथले पानी में इनकी जान को खतरा होता है।
इसी को देखते हुए वन विभाग और वर्ल्ड वाइल्ड फाउंडेशन ने इनके संरक्षण के लिए अब एक अनूठी पहल की हैं। इसके लिए नरौरा बैराज पर आधुनिक तकनीक और उन्नत सेंसर लगाए जाएंगे। यह डॉल्फिनों की सुरक्षा और संरक्षण का काम करेंगे। सेंसर की संपर्क में आते ही डॉल्फिन आगे नहीं बढ़ पाएगी। इन यंत्रों के माध्यम से डॉल्फिन की गतिविधियों पर नजर भी रखी जा सकेगी। ऐसा होने पर इनकी संख्या में भी इजाफा होगा।
उन्होंने बताया कि डॉल्फिनों की सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले यंत्र के लिए जगह चिह्नित कर ली गई है। साथ ही बिजनौर में इसका प्रशिक्षण भी पूरा हो चुका है। जल्द ही चिन्हित स्थानों पर यंत्र लगा दिए जाएंगे।