खानपुर क्षेत्र के गांव श्यौरापुर में बैंड, बाजा और बारात के बगैर ही बिटिया की डोली उठी। सादगी से बेटी की डोली उठने का जहां परिजनों को मलाल था, वही खुशी इस बात की थी कि बेटी को ऐसी ससुराल मिली, जहां दान-दहेज की कोई जगह नहीं है। दरअसल नोटबंदी के चलते लड़की पक्ष को बैंक से रुपये नहीं मिल रहे थे।
ऐसे में बिना दहेज की शादी का निर्णय लिया गया। इसमें सभी ने सहयोग दिया। यहां तक कि विवाह संस्कार कराने वाले आचार्य ने भी दक्षिणा नहीं ली। श्यौरापुर ग्राम के सतीश शर्मा के पुत्र राहुल का विवाह दो माह पूर्व चंदना की पुत्री मीनू निवासी मुरादनगर से 14 दिसंबर को होना तय हुआ था।
आठ नवंबर को नोटबंदी होने के बाद काफी प्रयासों के बावजूद लड़की की मां चंदना बैंक से रुपया निकालने में सफल नहीं हुई। चंदना ने वर पक्ष से बात की और विवाह की तिथि आगे बढ़ाने का आग्रह किया। सतीश ने परिवार में चंदना की मजबूरी पर चर्चा की।
सतीश की पत्नी राजवती ने लड़की पक्ष को संदेश भिजवाया कि शादी 14 दिसंबर को ही होगी, मगर दान दहेज और दावत पर खर्च नहीं किया जाएगा। तय कार्यक्रम के हिसाब से चंदना शर्मा आधा दर्जन परिवारजनों के साथ बुधवार सुबह श्यौरामपुर पहुंची।
राहुल और मीनू का बेहद सादगी के साथ प्राचीन शिव मंदिर प्रांगण में आचार्य नरेश चंद कौशिक ने विवाह संस्कार संपन्न कराया। नोटबंदी से उपजी परेशानी देखकर आचार्य ने दक्षिणा लेने से इंकार कर दिया।
कमलेश देवी, प्रेमवती, सुमन शर्मा, राजो चौधरी परशुराम सेवा समिति सचिव सुभाष शर्मा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य चौ. ऋषिपाल सिंह, शिव कुमार, सुशील शर्मा, ठा रतन सिंह, गजेन्द्र पाल, किसान संगठन अध्यक्ष राजकरन सिंह, मंगल शर्मा ने नव दंपति को आशीर्वाद दिया।