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Bulandshahar News: माघी पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी

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नरौरा के गांधीघाट पर गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद
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अनूपशहर/अहार/डिबाई/नरौरा। माघी पूर्णिमा पर गंगा तट रविवार को आस्था से सराबोर हो उठे। हजारों की संख्या में जुटे श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की। दोपहर तक धार्मिक कार्यक्रमों का दौर चला। खराब मौसम के बावजूद घाटों पर श्रद्धालु पहुंचे।
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अनूपशहर में माघी पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। खराब मौसम और रात में हुई बारिश के बावजूद सुबह काफी श्रद्धालु घाटों पर स्नान के लिए पहुंचे। मस्तराम घाट पर विशेष रूप से भीड़ देखी गई, जबकि अन्य घाटों पर भी श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। सनातन धर्म और शास्त्रों में माघी पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। हिंदू धर्म में माघी पूर्णिमा का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान, पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में इसे सभी पूर्णिमाओं में सबसे अधिक फलदायी माना गया है। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन समस्त देवी-देवता स्वर्ग से पृथ्वी पर आते हैं और गंगा में स्नान करते हैं। इसी कारण इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष विधान है।
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दान-पुण्य के लिहाज से खास महत्व रखने वाली माघी पूर्णिमा पर तड़के से श्रद्धालुओं के पहुंचने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह दोपहर बाद तक चलता रहा। सैकड़ों की संख्या में गंगा घाट पर जुटे महिला और पुरुषों ने गंगा में डुबकी लगाने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दिया। हर-हर गंगे की गूंज के बीच महिलाओं ने संकीर्तन किया। पूजा-अर्चना के बाद घाट पर मौजूद संत-महात्माओं को दान-दक्षिणा भेंट की। कन्याओं को भोज भी कराया गया। वहीं, दूसरी ओर भंडारे लगाकर प्रसाद का वितरण किया गया। वहीं, दूसरी ओर अहार में अवंतिका देवी समेत अन्य मंदिरों में भी गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु पूजन के लिए पहुंचे। इसी तरह कर्णवास, रामघाट औ राजघाट आदि गंगा घाटों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचे। पंडित कैलाश शर्मा के अनुसार इस पर्व पर डुबकी लगाकर जीवन में आई नकारात्मकता से भी मुक्ति पाई जा सकती है। माघी पूर्णिमा पर तिल और घी का दान विशेष फलदायी होता। पुराणों के अनुसार माघी पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु खुद गंगा स्नान करते हैं। ऐसे में मान्यता है कि गंगा जल के स्पर्श से मनसा, वाचा और कर्मणा हर तरह के पापों का शमन हो जाता है।
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