बुलंदशहर। विघ्नहर्ता भगवान गणेश का प्राकट्य महोत्सव 14 सितंबर, सोमवार को विशेष संयोग में मनाया जाएगा। इस दिन गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो स्थापना के लिए अति शुभ है। सोमवार को गणपति का आगमन सुख-समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति का प्रतीक माना गया है।
नगर से देहात तक गणपति स्थापना की तैयारियां तेज हो गई हैं। कैलाश शर्मा ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 07:06 बजे से शुरू होगी। यह तिथि 15 सितंबर सुबह 07:44 बजे तक रहेगी। भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए मध्याह्न में पूजन सर्वश्रेष्ठ होता है।
मध्याह्न पूजन मुहूर्त सुबह 11:04 बजे से दोपहर 1:33 बजे तक निर्धारित है। श्रेष्ठ स्थापना मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 1:15 बजे तक रहेगा। इस दौरान चित्रा नक्षत्र भी रहेगा, जिससे पूजा, संकल्प और मंत्र जाप विशेष फलदायी होंगे।
पूजन की विधि
पूजन में भगवान गणेश को हल्दी की माला, दूर्वा, रोली, कलावा, जनेऊ, मोदक, पान, सुपारी, केला, लौंग और इलायची अर्पित करना शुभ होता है। द्वादश महालिंगेश्वर सिद्ध पीठ के पीठाधीश्वर मंजीत धर्मध्वज ने बताया कि गणेश बुद्धि, विवेक, समृद्धि और सौभाग्य के देवता हैं।
श्रद्धालु प्रातः स्नान कर गणपति की प्रतिमा स्थापित कर पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजा करें। गणेश अथर्वशीर्ष और गणेश स्तोत्र का पाठ कर परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए। महोत्सव 11 दिन तक चलेगा। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन होगा।