सहपानी की पुष्पा को सरकारी मशीनरी ने पहले तो डा. राम मनोहर लोहिया आवासीय योजना के तहत पात्र मान लिया। पात्रता के आधार पर ग्राम्य विकास विभाग ने पुष्पा के एकाउंट में प्रथम किश्त के 1.37 लाख रुपये भी ट्रांसफर कर दिए। इतना सब कुछ होने के बावजूद सरकारी मशीनरी ने पुष्पा को बाद में अपात्र घोषित कर उसकी उम्मीद पर पानी फेर दिया।
अब पुष्पा का परिवार और ग्राम प्रधान सरकारी मशीनरी पर अवैध वसूली का आरोप लगा रहे हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में डा. राम मनोहर लोहिया आवास योजना के तहत जिले के गांवों में 797 आवासों का निर्माण होना है। लोहिया आवास उन गरीब परिवारों को दिए जाने थे, जिनके पास ख्द का आशियाना नहीं है।
बता दें कि सर्वे के दौरान सहपानी की पुष्पा देवी को मशीनरी ने मकान के लिए पात्र माना। पात्रता की कसौटी पर खरा उतरने के बाद ग्राम्य विकास विभाग की ओर से पुष्पा के बैंक एकाउंट में 1.37 लाख रुपये डाल दिए गए। सरकारी मदद मिलते ही पुष्पा मकान निर्माण की तैयारी में जुट गई।
इसी बीच पुष्पा के एकाउंट में डाली की रकम विभाग ने वापस निकाल ली। पुष्पा ने पता किया तो बताया गया कि आप अपात्र हैं। सवाल यह है कि जब पुष्पा अपात्र थी तो पात्रता की सूची में नाम कैसे आया और उसके एकाउंट में रुपये कैसे डाल दिए गए।
कुल मिलाकर सूत्रों का कहना है कि आवास आवंटन में रुपयों का लेनदेन कई स्तरों पर हुआ तभी तो पुष्पा जैसे 14 गरीब पहले पात्र हुए बाद में अपात्र कर दिए गए। वहीं सीडीओ जिम्मेदार अफसरों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
संबंधित बीडीओ और ग्राम पंचायत अधिकारियों को एडवर्स एंट्री की गई है। कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया है। - जसजीत कौर, सीडीओ
लोहिया आवासों की कीमत ‘50 हजार रुपये’
सूत्रों की मानें तो 30 हजार रुपये से 60 हजार रुपये तक एक आवास में जरुरतमंद से वसूले गए हैं। ऐसी कई शिकायत सीडीओ के पास भी पहुंची हैं। मगर अब तक अवैध वसूली के क्रम में जांच तक शुरू नहीं कराई गई है।